चुनाव आयोग ने 240 सांसदों से मुलाकात न होने पर दी सफाई, प्रोटोकॉल और प्रक्रिया का दिया हवाला
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मंगलवार को एक प्रेस नोट जारी कर विपक्षी सांसदों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात न हो पाने की वजह स्पष्ट की है। आयोग ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में 240 सांसदों के…
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मंगलवार को एक प्रेस नोट जारी कर विपक्षी सांसदों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात न हो पाने की वजह स्पष्ट की है। आयोग ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में 240 सांसदों के समूह से मिलने का प्रस्ताव स्थापित प्रोटोकॉल के विरुद्ध था और इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, आयोग ने बताया कि उसे मंगलवार को दिन में मीडिया के माध्यम से यह जानकारी मिली कि कुछ राजनीतिक दलों के सांसद मार्च कर रहे हैं और आयोग से मिलना चाहते हैं। हालांकि, आयोग ने साफ किया कि उस दिन शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने औपचारिक रूप से मुलाकात के लिए समय नहीं मांगा था।
मुलाकात की प्रक्रिया और प्रस्ताव
चुनाव आयोग के मुताबिक, शाम करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस ने सूचित किया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ज्ञापन सौंपने के लिए मिलना चाहता है। आयोग ने बताया कि राजनीतिक दलों के साथ बैठकों के लिए साल 2025 में ही एक प्रक्रिया तय कर दी गई थी, जिसकी जानकारी सभी दलों को है। इस नियम के तहत, कोई भी दल अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से मिलने का समय मांगता है, जिसके बाद आपसी सहमति से समय और तारीख तय होती है।
जब आयोग सांसदों के इस प्रस्ताव पर विचार कर ही रहा था, तभी दिल्ली पुलिस के डीसीपी ने बताया कि यह बैठक 240 सांसदों के समूह के साथ होनी है और इसका प्रस्तावित स्थान संसद भवन का 'एनेक्सी' है। आयोग ने इस अनुरोध को 'असामान्य' मानते हुए अस्वीकार कर दिया, क्योंकि प्रोटोकॉल के तहत ऐसी सभी बैठकें केवल भारत निर्वाचन आयोग के परिसर में ही होती हैं।
आयोग का वैकल्पिक प्रस्ताव
इस गतिरोध को दूर करने के लिए निर्वाचन आयोग ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए एक वैकल्पिक प्रस्ताव भी दिया। आयोग ने कहा कि वह सांसदों का ज्ञापन लेने के लिए अपने सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को बैठक स्थल पर भेज सकता है। हालांकि, आयोग के अनुसार, सांसदों ने इस प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया।
अंत में, ECI ने अपने बयान में कहा कि वह देश की संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करता है, लेकिन अपने स्वयं के प्रोटोकॉल और परंपराओं का पालन करना भी उसके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आयोग ने दोहराया कि कोई भी राजनीतिक दल कभी भी मिलने का अनुरोध कर सकता है और उपलब्धता के आधार पर समय तय किया जा सकता है।
इनपुट: IANS



