मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, चुनाव आयोग ने तय की फॉर्म-7 की सीमा
भारत के चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से किसी का नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला किया है। अब कोई भी एक व्यक्ति थोक में आपत्तियां दर्ज नहीं करा पाएगा। समाचार एजेंसी…
भारत के चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से किसी का नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला किया है। अब कोई भी एक व्यक्ति थोक में आपत्तियां दर्ज नहीं करा पाएगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने पाया कि कई बार लोग बिना किसी ठोस आधार के बड़ी संख्या में फॉर्म-7 भरकर आपत्ति जता देते हैं, जिससे संबंधित मतदाताओं को बेवजह परेशानी होती है और चुनावी अधिकारियों पर काम का बोझ भी बढ़ता है।
इसी समस्या को देखते हुए आयोग ने फॉर्म जमा करने की एक निश्चित सीमा तय कर दी है। यह फैसला ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरह से आवेदन करने पर लागू होगा। इस संबंध में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
क्या है फॉर्म-7 जमा करने की नई सीमा?
चुनाव आयोग के नए नियमों के मुताबिक, अब कोई भी एक मतदाता 'दावे और आपत्तियों' की पूरी अवधि के दौरान अधिकतम 10 फॉर्म-7 ही दाखिल कर सकेगा। इसके अलावा, मतदाता सूचियों के निरंतर अद्यतन (continuous updation) के दौरान यह सीमा हर महीने सिर्फ 5 आवेदनों की होगी। आयोग ने यह भी साफ किया है कि एक व्यक्ति के लिए ऑनलाइन माध्यम से एक बार में 6 आवेदन करने की सीमा पहले से थी, लेकिन फिजिकल फॉर्म के लिए कोई स्पष्ट संख्या तय नहीं थी, जिसे अब निर्धारित कर दिया गया है।
राजनीतिक दलों और अन्य नियमों पर स्पष्टीकरण
आयोग ने बताया कि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) को थोक में आवेदन देने की अनुमति है, लेकिन उनके लिए भी सीमाएं हैं। वे ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन से पहले एक दिन में 50 से अधिक फॉर्म और उसके बाद प्रतिदिन 10 से ज्यादा फॉर्म जमा नहीं कर सकते।
इसके साथ ही, आयोग ने कुछ और नियम भी स्पष्ट किए हैं:
- अधूरे आवेदन खारिज होंगे: निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम (Registration of Electors Rules), 1960 के नियम 17 के तहत, अगर कोई फॉर्म अधूरा या गलत प्रारूप में है तो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) उसे खारिज कर देगा।
- मूल हस्ताक्षर अनिवार्य: फॉर्म-7 पर आपत्ति करने वाले व्यक्ति के मूल हस्ताक्षर होने चाहिए, किसी तरह की मुहर मान्य नहीं होगी।
- झूठी शिकायत पर कार्रवाई: यदि कोई शिकायत जांच में झूठी या मनगढ़ंत पाई जाती है, तो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आयोग ने जोर देकर कहा कि ERO को हर आवेदक की प्रामाणिकता की जांच करनी होगी ताकि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग रोका जा सके।
इनपुट: IANS



