चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने एक आरोपी की जमानत रद्द की, दूसरे की अर्ज़ी खारिज
फर्जी चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप्स के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक आरोपी को दी गई जमानत रद्द कर दी है, जबकि दूसरे की जमानत याचिका खारिज कर दी है। मंगलवार को दिए अपने…
फर्जी चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप्स के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक आरोपी को दी गई जमानत रद्द कर दी है, जबकि दूसरे की जमानत याचिका खारिज कर दी है। मंगलवार को दिए अपने फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि मूल अपराध में समझौता हो जाने पर भी उससे जुड़ी आपराधिक गतिविधि समाप्त नहीं हो जाती।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की अर्जी स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। यह मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज है, जिसमें भूपेश अरोड़ा और रोहित विज नाम के दो व्यक्ति आरोपी हैं। कोर्ट ने भूपेश अरोड़ा की जमानत रद्द कर दी और रोहित विज की याचिका खारिज कर दी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला ED द्वारा की जा रही एक विस्तृत जांच का हिस्सा है, जिसमें लोक्सम (Loxam) समेत कई फर्जी चीनी इन्वेस्टमेंट ऐप्स के नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। इन ऐप्स पर निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर फंसाने का आरोप है। जांच के अनुसार, इन ऐप्स से होने वाली कमाई को कई फर्जी कंपनियों और बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था।
ED के मुताबिक, इस पैसे को बाद में कैश और विदेशी मुद्रा में बदलकर हवाला चैनलों के जरिए देश से बाहर भेज दिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में चीनी और ताइवानी नागरिकों की संलिप्तता के भी आरोप हैं, जिन पर पैसे को रूट करने के लिए कंपनियां और बैंक खाते बनाने में मदद करने का शक है।
आरोपियों की भूमिका
जांच में सामने आया है कि रोहित विज ने फंड को एक जगह से दूसरी जगह भेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आरोप है कि वह रंजन मनीकॉर्प प्राइवेट लिमिटेड और केडीएस फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों से जुड़ा था। इन्हीं कंपनियों के माध्यम से अवैध कमाई को बैंक ट्रांसफर से कैश और विदेशी मुद्रा में बदलकर हवाला के जरिए विदेश भेजा गया।
इस मामले में ED की तरफ से एएसजी अनिल कौशिक और वकील अर्कज कुमार ने पैरवी की। वहीं, भूपेश अरोड़ा का पक्ष सीनियर एडवोकेट मुक्ता गुप्ता ने और रोहित विज का पक्ष सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ अग्रवाल ने रखा।
इनपुट: IANS



