चाइल्ड पोर्नोग्राफी और डीपफेक पर कसेगा शिकंजा, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताई अपनी योजना
केंद्र सरकार चाइल्ड पोर्नोग्राफी, बिना सहमति के अश्लील सामग्री और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए फेक कंटेंट से निपटने के लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचा तैयार करने पर विचार कर रही है। मंगलवार को…
केंद्र सरकार चाइल्ड पोर्नोग्राफी, बिना सहमति के अश्लील सामग्री और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए फेक कंटेंट से निपटने के लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचा तैयार करने पर विचार कर रही है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार ने यह जानकारी दी।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) की पीठ को बताया कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित फ्रेमवर्क केवल चाइल्ड पोर्नोग्राफी तक ही सीमित नहीं होगा, बल्कि इसमें वयस्कों की सहमति के बिना उनकी अश्लील सामग्री साझा करने जैसे मामलों को भी शामिल किया जाएगा।
इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स की बढ़ेगी जवाबदेही
एसजी मेहता ने अदालत को सूचित किया कि नए विधेयक के तहत इंटरनेट प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यस्थों (Intermediaries) की जिम्मेदारियों को बढ़ाया जा सकता है। उनकी भूमिका सिर्फ आपत्तिजनक कंटेंट हटाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ऐसा कंटेंट अपलोड होने पर संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देने की भी जिम्मेदारी उन पर डाली जा सकती है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने AI की मदद से तैयार हो रहे आपत्तिजनक कंटेंट, मॉर्फ्ड तस्वीरों और डीपफेक के बढ़ते मामलों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर ऐसी सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था की सख्त जरूरत है।
शिकायत करना होगा आसान
केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित नीति के तहत शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को भी सरल और व्यापक बनाया जा सकता है। इसके तहत केवल पीड़ित ही नहीं, बल्कि कोई भी तीसरा व्यक्ति सद्भावना से इस तरह के कंटेंट के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकेगा। सरकार के मुताबिक, इन सभी मुद्दों पर अभी नीतिगत स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है।
इनपुट: IANS



