सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भारत-यूएई 'माउंटेन गार्जियन' अभ्यास: उत्तराखंड की पहाड़ियों में परखी जा रही है सैन्य क्षमता

उत्तराखंड की चुनौतीपूर्ण पर्वत श्रृंखलाओं में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सेनाएं एक साथ अपनी युद्धक क्षमताओं को निखार रही हैं। सोमवार को चौबटिया में 'माउंटेन गार्जियन 2026' नामक संयुक्…

भारत-यूएई 'माउंटेन गार्जियन' अभ्यास: उत्तराखंड की पहाड़ियों में परखी जा रही है सैन्य क्षमता
(फोटो: IANS)

उत्तराखंड की चुनौतीपूर्ण पर्वत श्रृंखलाओं में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सेनाएं एक साथ अपनी युद्धक क्षमताओं को निखार रही हैं। सोमवार को चौबटिया में 'माउंटेन गार्जियन 2026' नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू हुआ, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का प्रतीक है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह विशेष अभ्यास 5 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक चलेगा, जिसका मुख्य केंद्र बिंदु ऊंचे पहाड़ों पर युद्ध कौशल को मजबूत करना है।

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इस अभ्यास में दोनों देशों के कुल 92 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें दोनों पक्षों की बराबर की भागीदारी है। भारत की ओर से भैरव बटालियन के जवान शामिल हुए हैं, जबकि यूएई का प्रतिनिधित्व उनकी माउंटेन इन्फेंट्री बटालियन कर रही है। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस अभ्यास में दोनों देशों की महिला अधिकारी और सैनिक भी विभिन्न विशेषज्ञ भूमिकाओं में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं।

अभ्यास का उद्देश्य और गतिविधियां

पहाड़ी इलाकों में सैन्य अभियान बेहद कठिन माने जाते हैं, जहाँ ऊंचाई, ढलान और दुर्गम रास्ते लगातार चुनौती पेश करते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए 'माउंटेन गार्जियन' में सैनिकों के बीच बेहतर तालमेल और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता पर जोर दिया जा रहा है।

चौबटिया स्थित विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित इस अभ्यास के दौरान, सैनिक कई कठिन प्रशिक्षण गतिविधियों से गुजरेंगे। इनमें सामरिक योजना बनाना, युद्धाभ्यास, सटीक निशानेबाजी और निगरानी तंत्र स्थापित करना शामिल है। इसके अलावा, आधुनिक युद्धनीति के तहत ड्रोन संचालन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। शारीरिक क्षमता को परखने के लिए सहनशक्ति प्रशिक्षण, चट्टानों पर चढ़ाई और बाधा प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां भी इसका हिस्सा हैं।

अनुभव साझा करना और भविष्य की तैयारी

यह अभ्यास सिर्फ पारंपरिक सैन्य प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों सेनाओं के लिए एक-दूसरे से सीखने का एक महत्वपूर्ण मंच भी है। दोनों पक्ष पर्वतीय क्षेत्रों में तकनीक-आधारित सैन्य अभियानों से जुड़े अपने अनुभव साझा करेंगे। इसका लक्ष्य एक-दूसरे की रणनीतियों, तकनीकों और सैन्य प्रक्रियाओं को समझना है, ताकि भविष्य में किसी संयुक्त अभियान के दौरान बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके।

अंततः, दोनों सेनाएं एक एकीकृत मैदानी अभ्यास करेंगी, जिसमें कठिन पर्वतीय परिस्थितियों में संयुक्त रूप से अभियान चलाने की उनकी क्षमता का परीक्षण किया जाएगा। यह अभ्यास न केवल दोनों सेनाओं की सामरिक दक्षता को बढ़ाएगा, बल्कि भारत और यूएई के बीच सैन्य सहयोग, मित्रता और विश्वास के रिश्ते को भी और मजबूती प्रदान करेगा।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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