जामिया: छात्र संघ चुनाव की मांग पर 18 दिन से प्रदर्शन जारी, प्रशासन पर मनमानी और धमकी देने के आरोप
दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन 18वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन से चुनाव की तारीखों का…
दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन 18वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन से चुनाव की तारीखों का ऐलान कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, छात्रों ने प्रशासन पर सत्तावादी रवैया अपनाने और उनकी आवाज़ को दबाने का गंभीर आरोप लगाया है।
प्रदर्शन में शामिल एक पीएचडी छात्रा उजमा ने एजेंसी से बातचीत में कहा कि यह आंदोलन सिर्फ चुनाव के लिए नहीं, बल्कि प्रशासन के तानाशाही रवैये के खिलाफ है। उन्होंने बताया, "छात्र संघ की जरूरत इसलिए है क्योंकि प्रशासन का जो रवैया है, वह पूरी तरह से सत्तावादी हो चुका है। कैंपस में रहने वाले छात्र रोजमर्रा की जिंदगी में जिन समस्याओं का सामना करते हैं, उनको सुनने वाला कोई नहीं है।"
हॉस्टल खाली करने का फरमान और धमकी के आरोप
उजमा ने हॉस्टल से जुड़ी एक हालिया घटना का ज़िक्र करते हुए प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया। बेगम हजरत महल गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली छात्रा के मुताबिक, बुधवार रात अचानक सभी छात्राओं को शनिवार तक हॉस्टल खाली करने का आदेश दे दिया गया, जिसके लिए कोई आधिकारिक नोटिस भी जारी नहीं किया गया। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब विश्वविद्यालय ने 12 जनवरी तक कैंपस बंद करने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि कई छात्राओं को हाल ही में प्लेसमेंट ऑफर मिले हैं और कई पीएचडी स्कॉलर हैं जिन्हें अपनी पढ़ाई के लिए लाइब्रेरी और किताबों की जरूरत है। ऐसे में अचानक हॉस्टल खाली करने का आदेश "पूरी तरह से अव्यावहारिक" है। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे अपनी समस्या लेकर वार्डन के पास जाती हैं तो उन्हें रेस्टिकेशन और लाठीचार्ज तक की धमकी दी जाती है। उजमा के अनुसार, "महिला होने के नाते उन्हें बेहद आपत्तिजनक बातें सुननी पड़ती हैं।"
छात्राओं की परेशानी का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि केरल, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे दूर-दराज के राज्यों की लड़कियों को घर जाने के लिए 3-4 दिन का समय लगता है और इस वक्त ट्रेनों में आरक्षण मिलना भी मुश्किल है। उन्होंने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को हॉस्टल में बैठे "नालायक प्रशासन" को हटाकर ऐसे लोगों को जिम्मेदारी देनी चाहिए जो छात्राओं की समस्याओं का समाधान करें।
जब प्रशासन द्वारा 15 दिनों में चुनाव कराने के आश्वासन के बारे में पूछा गया, तो उजमा ने कहा कि उनकी मुख्य मांग चुनाव ही है, लेकिन वे चाहते हैं कि प्रशासन इसके लिए एक स्पष्ट समय-सीमा जारी करे।
इनपुट: IANS



