हार ने दबाया पैनिक बटन

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भारत 300 रन बना कर मैच हार जाए ये कोई आम बात नहीं है। अक्टूबर 2012 से जुलाई 2015 के बीच क्रिकेट के नए नियम लागु होने के बाद से भारत ने 16 बार 300 से ज्यादा रन बनाये। जिनमे से केवल 2 में भारत को हार का सामना करना पड़ा।

अगर क्रिकेट की शुरुआत से बात करें तो भारत 300 से ज्यादा रन बना कर 95 में से केवल 19 मैच हरा है। इनमे से 5 हार भारत ने पिछले 18 महीने में देखी हैं, जिनमे 3 ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक ही सीरीज में आयीं, एक इंग्लैंड के खिलाफ कोलकाता में जनवरी में और एक गुरूवार को ओवल में श्रीलंका के खिलाफ आयी ।

सबसे बड़ा झटका।

गुरुवार को भारत को एक बड़ा झटका श्रीलंका के खिलाफ हार से लगा, एक ऐसी टीम जिसका पिछले कुछ रिकॉर्ड बिलकुल भी अच्छा नहीं रहा है और हाल ही में साउथ अफ्रीका ने उन्हें धूल चटाई थी। श्रीलंका का एक मुख्य प्लेयर (उपुल थरंगा) दो मैच का बन झेल रहा था और खुद कप्तान मैथ्यूस चोट के कारन गेंदबाजी नहीं कर पा रहे हैं।

किसी ने उम्मीद भी नहीं की होगी की श्रीलंका 321 रन का पहाड़ आराम से पार कर जाएगा। इस हार ने भारत के सामने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हार के बाद भारत के कप्तान विराट कोहली ने कहा कि ” हम अपराजेय नहीं हैं, क्रिकेट में कोई भी हमेशा नहीं जीत सकता ”

भारत कि गेंदबाज़ी खराब नहीं थी, पर कहीं न कहीं उसमे धार कि कमी नज़र आयी। कोई भी श्रीलंकन बल्लेबाज़ क्रीज़ पर किसी तरह से परेशान नहीं दिखा, किसी असमंजस में नहीं दिखा । भारत के गेंदबाज़ो में केवल भुवनेश्वर कुमार व जसप्रीत बुमराह पर हमला करना थोड़ा मुश्किल दिख रहा था लेकिन बाकी गेंदबाज़ो को श्रीलंका ने बहुत आसानी से खेला। मैच के बाद रोहित शर्मा ने कहा कि ” एक दिवसीय गेम में हमे छोटी छोटी जंग जीतनी होती हैं और हम गेंदबाज़ी में हार गए। हमें बीच के ओवरों में और विकेट ले कर उनपर दबाव बनाना चाइये था जो करने में हम नाकाम रहे ”

भारत कि और से केवल भुवनेश्वर कुमार एक विकेट ले पाए, बाकि 2 विकेट भारत को रन आउट के रूप में मिली। यह वही गेंदबाज़ी अटैक है जिसकी तारीफ न केवल विराट कोहली बल्कि सरफ़राज़ अहमद और अंगेला मैथ्यूस ने भी कि थी और कहा था कि यह चैंपियंस ट्रॉफी के सबसे खतरनाक गेंदबाज़ी अटैक में से एक है। यह वही गेंदबाज़ी अटैक है जिसने पाकिस्तान को केवल 164 रन पर समेट दिया था।

बैठ कर सिलेक्शन में कमियां निकलना एक आसान काम है पर यह कहना भी गलत नहीं होगा कि भारत कि गेंदबाज़ी थोड़ी हलकी नज़र आयी। बीच के ओवरों में गेंदबाज़ी बिलकुल भी धारदार नहीं नज़र आयी, हार्दिक पंड्या जिनमे अनुभव की कमी है और रविंद्र जडेजा जिनकी गेंद घूम नहीं रही थी कहीं से भी विकेट लेने की क्षमता नहीं दिखा पाए।

जडेजा के प्रदर्शन को एक बुरा दिन समझ कर भुला जा सकता है क्यूंकि उनके करियर के आंकड़े काफी बेहतर हैं और उन्होंने 4.9 की इकॉनमी से 153 एकदिवसीय विकेट लिए हैं। पर हार्दिक पंड्या जरूर एक चिंता का विषय हैं क्यूंकि उनके फर्स्ट क्लास करियर में भी उनके केवल 24 विकेट हैं ।

कोई गारंटी नहीं।

इस बात की कोई गारंटी नहीं है की आश्विन, जिनका पिछले साल ऑस्ट्रेलिया की फ्लैट पिचेस पर प्रदर्शन लचर रहा भी कुछ ख़ास कर पाते और कोहली को टीम का बैलेंस भी देखना पड़ता होगा। लेकिन हमारे गेंदबाज़ी आक्रमण को रविवार को साउथ अफ्रीका से होने वाले मैच से पहले सशक्त होकर दिखाना होगा। यह दोनों टीमों के लिए एक नॉक आउट मुकाबला बन चुका है और जीतने वाली टीम ही सेमि फाइनल में जाएगी। भारत के पास आजमाने के लिए मोहम्मद शमी के रूप में एक विकल्प बचा है जिन्होंने काफी बार अपनी उपयोगिता साबित की है।

देखना यह होगा कि रविवार के मैच में भारत क्या रणनीति ले कर उतरेगा। साउथ अफ्रीका टीम इस समय विश्व कि नंबर एक एकदिवसीय टीम है पर बड़े मैचों में दबाव के कारण लड़खड़ाने के लिए जानी जाती है, वह भी इस बात को गलत साबित करने उतरेंगे। अब देखना होगा कि उस दिन कौनसी टीम बेहतर खेल कर सेमि फ़ाइनल में अपनी जगह बना पाएगी । यह मुकाबला रविवार, भारतीय समय के अनुसार दोपहर 3 बजे से खेला जाएगा।