दिल्ली चावल घोटाला: AAP ने मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की भूमिका की CBI जांच की मांग की
दिल्ली में सामने आए कथित चावल घोटाले में आम आदमी पार्टी (आप) ने अब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, आप के दिल्ली प्रदेश…
दिल्ली में सामने आए कथित चावल घोटाले में आम आदमी पार्टी (आप) ने अब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक को एक पूरक शिकायत सौंपते हुए मंत्री को जांच के दायरे में लाने की मांग की है।
सौरभ भारद्वाज का आरोप है कि दिल्ली के गरीबों के लिए предназначен सब्सिडी वाले चावल को निजी कंपनियों के माध्यम से खुले बाजार में बेच दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी वित्तीय हानि हुई। उन्होंने दावा किया कि मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने चावल की खरीद और आवंटन से जुड़े प्रस्तावों को बार-बार मंजूरी दी, लेकिन सीबीआई की प्राथमिकी (FIR) में उनका नाम आरोपी के तौर पर शामिल नहीं है।
निलंबित अधिकारी के जवाब से उठे सवाल
आप नेता ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के निलंबित अतिरिक्त आयुक्त अरुण कुमार झा के एक लिखित जवाब का हवाला दिया। भारद्वाज के अनुसार, झा ने अपने जवाब में सात अलग-अलग जगहों पर मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा का नाम लिया था। अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) को भेजे गए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) और अन्य प्रशासनिक मंजूरियां मंत्री के साथ चर्चा और उनके निर्देशों के बाद ही जारी की गई थीं। भारद्वाज ने तर्क दिया कि अगर अनियमितताओं के आरोप में एक अधीनस्थ अधिकारी को निलंबित किया जा सकता है, तो उन फैसलों को मंजूरी देने वाले वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
प्रक्रिया और आवंटन पर आरोप
शिकायत के अनुसार, नेरामेक ने 7 जनवरी 2026 को 31,000 मीट्रिक टन चावल की आपूर्ति का अनुरोध किया था, जिस पर मंत्री ने 8 अप्रैल 2026 को सकारात्मक विचार करने के निर्देश दिए। आप नेता ने आरोप लगाया कि 4 मई 2026 को दोबारा इतने ही चावल के आवंटन का अनुरोध किया गया और उसे भी आगे बढ़ा दिया गया, जबकि पहले दिए गए 3.1 करोड़ किलोग्राम चावल के वितरण का कोई हिसाब, स्टॉक रिकॉर्ड या उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं था। भारद्वाज ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के बजाय एक 'आपराधिक साजिश' का हिस्सा बताया है।
सरकार को करोड़ों का नुकसान
भारद्वाज के आरोपों के मुताबिक, इस घोटाले में सब्सिडी वाले चावल, जिसका प्रस्तावित मूल्य 23.20 रुपये प्रति किलोग्राम था, उसे कथित तौर पर मैसर्स उत्पालक्षी एग्रो प्रोडक्ट्स, मैसर्स दिबेश कमर्शियल और मैसर्स सुपर ग्रेन्स जैसी निजी कंपनियों के माध्यम से हरियाणा की व्यावसायिक इकाइयों को 46 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा गया। उन्होंने दावा किया कि इस गतिविधि से सरकार को प्रति सप्ताह लगभग 13.67 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और यह सिलसिला करीब 22 सप्ताह तक चला।
CBI से तीन प्रमुख मांगें
सौरभ भारद्वाज ने अपनी पूरक शिकायत में सीबीआई से तीन मुख्य मांगें की हैं:
1. मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की कथित भूमिका की जांच के लिए मामले का दायरा बढ़ाया जाए।
2. जनवरी से जून 2026 के बीच मंत्री कार्यालय से जुड़ी फाइलों, ईमेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित किया जाए ताकि सबूतों से छेड़छाड़ न हो सके।
3. निलंबित अधिकारी के जवाब में उल्लिखित सभी व्यक्तियों के बयान दर्ज कर पैसे के लेन-देन की जांच की जाए।
अंत में, भारद्वाज ने कहा कि मंत्री प्रवेश वर्मा के बाद अब मनजिंदर सिंह सिरसा भी उन पर मानहानि का मुकदमा कर सकते हैं, लेकिन ऐसे मुकदमे उन्हें कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाने से नहीं रोक सकते।
इनपुट: IANS



