मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग करने वाली याचिकाओं पर कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को…
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के निलंबन की मांग करने वाली याचिकाओं पर कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले पर केंद्र सरकार और भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाओं में सीईसी के काम करने के तरीके और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े उनके कुछ फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने की। पीठ ने इस मामले को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लंबित एक अन्य याचिका के साथ जोड़ दिया है। नोटिस केंद्र सरकार के अलावा चुनाव आयोग, सीईसी ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर संधु और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी को भी जारी किए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में क्या कहा?
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर चिंता जताई। वकील विकास सिंह ने दलील दी कि 2023 के कानून ने चुनाव आयोग के अधिकारों को बढ़ाया है, लेकिन आयोग की विश्वसनीयता इतनी कम हो गई है कि "हर नागरिक असुरक्षित महसूस कर रहा है"। उन्होंने सुनवाई पूरी होने तक सीईसी ज्ञानेश कुमार की शक्तियों को निलंबित करने की मांग की।
एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा, "नागरिकों के वोटिंग अधिकार खतरे में हैं और सीईसी पक्षपाती हैं।" उन्होंने कहा, "हमने इस देश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव होते देखे हैं। आज वैसी स्थिति नहीं है। यह एक राष्ट्रीय समस्या है।" गुरुस्वामी ने अपनी एक अन्य याचिका में 'फॉर्म 6' में हुए बदलावों और एसआईआर प्रक्रिया में खामियों का भी आरोप लगाया। जब पीठ ने उनसे याचिका में की गई मांगों के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि वह अपनी मांगों पर कायम हैं।
इनपुट: IANS



