मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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छोटे उद्योगों की ग्रोथ के लिए ₹10,000 करोड़ का फंड, कैबिनेट ने दी SME ग्रोथ फंड को मंज़ूरी

भारत के छोटे और मझोले उद्यमों (SMEs) को आगे बढ़ने और अपना विस्तार करने के लिए ज़रूरी पूंजी उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय…

छोटे उद्योगों की ग्रोथ के लिए ₹10,000 करोड़ का फंड, कैबिनेट ने दी SME ग्रोथ फंड को मंज़ूरी
(फोटो: IANS)

भारत के छोटे और मझोले उद्यमों (SMEs) को आगे बढ़ने और अपना विस्तार करने के लिए ज़रूरी पूंजी उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को 10,000 करोड़ रुपए के ‘एसएमई ग्रोथ फंड’ (SGF) की स्थापना को मंज़ूरी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस पहल का मकसद उन भारतीय कंपनियों के लिए पूंजी की कमी को दूर करना है, जो तरक्की की राह पर हैं।

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यह फंड उन चुनिंदा कंपनियों को मदद करेगा जो मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं। सरकार का मानना है कि यह पहल 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को पाने में मददगार होगी, जिसके तहत देश के उद्यमिता इकोसिस्टम को मज़बूत किया जाना है।

छोटे उद्योगों को क्यों है इस फंड की ज़रूरत?

छोटे और मझोले उद्यम (SMEs) भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। ये रोज़गार पैदा करने, निर्यात बढ़ाने और इनोवेशन में बड़ी भूमिका निभाते हैं। कैबिनेट की ओर से जारी बयान में बताया गया कि अब तक क्रेडिट यानी क़र्ज़ मिलना तो आसान हुआ है, लेकिन उन कंपनियों के लिए लंबी अवधि की ‘रिस्क कैपिटल’ (जोखिम पूंजी) की कमी बनी हुई थी, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करना, नई तकनीक अपनाना या दूसरी कंपनियों का अधिग्रहण करना चाहती हैं।

सरकार के अनुसार, मौजूदा इक्विटी फंड ज़्यादातर शुरुआती या बहुत छोटे उद्यमों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे ग्रोथ-स्टेज वाली कंपनियों के लिए एक खालीपन बना हुआ था। एसएमई ग्रोथ फंड इसी कमी को पूरा करने के लिए बनाया गया है, ताकि अच्छी संभावनाओं वाली कंपनियों को आगे बढ़ने के लिए ‘पेशेंट ग्रोथ इक्विटी कैपिटल’ (धैर्य के साथ निवेश की गई पूंजी) मिल सके।

बजट घोषणा का हिस्सा

यह पहल केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई घोषणाओं का ही एक हिस्सा है। उस बजट का एक बड़ा उद्देश्य एमएसएमई इकोसिस्टम को इक्विटी, लिक्विडिटी (पूंजी की उपलब्धता) और प्रोफेशनल मदद मुहैया कराना था। इस फंड के ज़रिए सरकार ऐसी भारतीय कंपनियों की एक नई पीढ़ी तैयार करना चाहती है, जो वैश्विक स्तर पर मुकाबला कर सकें।

इनपुट: IANS

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