बवाना अग्निकांड : दिल्ली सरकार को ठहराया ज़िम्मेदार

देश में हर जगह आतंक फ़ैल रहा है. अभी दो दिन पहले बम से बोधगया को उड़ाने की साजिश रची गयी थी. बोधगया का  महाबोधी मंदिर तो बच गया ,पर उस हादसे ने देश के लोगों के  साथ- साथ सैनिकों को भी डरा दिया. लोगों की दहशत थोड़ी शांत ही हुई थी पर ज्यादा देर तक ये शांति बरकरार न रह पायी. एक और अग्निकांड का हादसा सामने आया है.

दिल्ली के बवाना में हाल ही में एक अग्निकांड हुआ है. अग्निकांड की खबर आजकल सुर्ख़ियों में है. बता दें कि अग्निकांड में 17 लोगों की मौत हो गयी है. इनमें से मौजूद तीन भाइयों ने तो कुछ दिन पहले ही नौकरी की शुरुआत की थी. रोहित, संजित और सूरज इन तीनों के नाम हैं. दरसल ये सारे भाई एक फैक्ट्री में काम करते थे. एक दिन इनके अधिकारी रूप प्रकाश ने इन तीनों को पटाखे की पैकिंग के लिए बुलाया था. कुछ दिनों से ये लोग ओवरटाइम कर रहे थे. अचानक से फैक्ट्री में आग लगने से रुपप्रकाश छत से कूद गया. कूदने से उनका पैर तो टूट गया पर उनकी जान बच गयी. वहीँ ये तीनों भाई कूद नहीं पाए और न ही कहीं भागने में समर्थ रहे जिस कारण आग को ज्यादा देर तक ये झेल न पाए और तीनों भाइयों की मौत हो गयी. हालाँकि ख़बरों के मुताबिक फैक्ट्री के अधिकारी रूप प्रकाश ने छत से कूदने से पहले तीनों की जान बचने की कोशिश की थी. जब कुछ बात न बनीं तो उन्होंने स्वयं कूदकर अपनी जान बचायी.

सूत्रों के मुताबिक चौकीदार ने मालिक मनोज जैन के कहने पर फैक्ट्री का दरवाजा लॉक कर रखा था, ताकी मजदूर 6 घंटें की शिफ्ट पूरी करकें ही बाहर निकलें.

विपक्ष में बैठी बीजेपी ने दिल्ली सरकार को इस हादसे के लिए ज़िम्मेदार बताया है. बीजेपी सांसद लेखी का कहना है कि यहां अवैध निर्माण ना हो ये देखना भी सरकार के दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DSIIDC) का काम है. फैक्टरी में पटाखे बन रहे थे लेकिन दिल्ली सरकार का आयोग अग्निशमन विभाग और पर्यावरण विभाग क्या कर रहा था?

वहीँ दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति के मुताबिक़ बवाना में कम से कम 50,000 ऐसी अवैध फैक्ट्री चल रही हैं. ये सिस्टम की सोच समझी प्लानिंग है.