बुंदेलखंड: छोटे शहर के बड़े सपने , और बड़े सपनो का काला सच

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आँखों में पल रहे मासूम सपने , पेट में लगी भूख की आग और गरीबी से मर रहे है अपने हमें वो सब सिखा जाती है जो महानगरों की आलिशान जिंदगी हमे कभी नही सिखा सकती l गरीबी ,हालत और अपने सपनो के हाथों मजबूर होकर छोटे शहर के लोग महानगरों का रुख करते है l भारत में कुछ शहरों की ज़मीनी हकीकत इतनी भयानक है कि आपकी रूह तक काँप जाये l ऐसा ही कुछ देखने को मिला भारत के एक छोटे शहर बुंदेलखंड में l

बुंदेलखंड की ज़मीनी हकीकत कर देगीआपके भी रौंगटे  खड़े
बुंदेलखंड की ज़मीनी हकीकत जानने के लिए सामाजिक संगठन ‘बुंदेलखंड जल मंच’ ने एक अध्ययन किया है। अध्ययन दल की सदस्य अफसर जहां ने आईएएनएस से कहा, “”अध्ययन के दौरान हम छतरपुर जिले के लवकुशनगर के पास रनमउ गांव पहुंचे तो पता चला कि यहां की एक युवती को, जो अपने परिवार के साथ दिल्ली काम करने गई थी, उसे कई लोगों ने अपनी हवस का शिकार बनाया। किसी तरह वह वापस अपने गांव आई और बाद में उसकी शादी हो गई।””

आपको बता दें कि यह इस तरह के अपराध का कोई पहला मामला नहीं है l ऐसी कई युवतियां और औरतें है जो गाँवों और छोटे शहरों से बड़े शहरों में जाती तो काम की तलाश में है ,लेकिन वहां जाके यौन शोषण और बलात्कार जैसे घिनौने अपराधों का शिकार होती है l

बुंदेलखंड जल मंच ने आगे बाते कि पीड़ित युवती और उसके परिवार का नाम वे उजागर नहीं कर रही हैं, क्योंकि वह एक दलित परिवार से ताल्लुक रखते है। यहाँ कई परिवार तो ऐसे भी है ,जिन्होंने रोज़गार की तलाश में अपने परिवार के साथ महानगरों का रुख किया ,महानगरों से वो तो लौट आये लेकिन उनकी जवान बेटियाँ उनके साथ नहीं लौटी l उन लड़कियों का खुला शोषण किया गया l कुछ को देह व्यापर के दलदल में धकेल दिया गया l और बाद में इन लड़कियों का क्या होता है इसकी जानकारी किसी को नहीं है l आपको बता दें कि अपनी बच्चियों की तलब लेने जब पुलिस के पास जाता है तो सिर्फ गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर खानापूर्ति कर ली जाती है। वहीं कुछ पीड़ित परिवार बदनामी के डर से थानों के चक्कर नहीं लगाते।घुवारा थाना क्षेत्र के बोरी गांव के बुजुर्ग मलखान सिंह (70) ने बताया कि उनके गांव का एक व्यक्ति रोजगार की तलाश में अपनी पत्नी के साथ दिल्ली गया था, कुछ दिनों बाद वह अकेला लौटा। जब उससे पूछा गया कि पत्नी कहां है, तो उसका जवाब था कि वह किसी और के साथ रहने लगी है। आज वह व्यक्ति परेशान है और गांव में मवेशियों को चराकर अपना गुजारा कर रहा है।

गरीबी के हाथों मजबूर होकर लड़कियां कर देती है आत्मसमर्पण
सामाजिक कार्यकर्ता विनय श्रीवास ने बताया कि बुंदेलखंड में बढ़ रही बेरोज़गारी ने लोगों का यह हाल कर दिया है कि उनके लिए इज्जत-आबरूबचाना तक मुश्किल हो गया है। जो परिवार रोज़गार की तलाश में महानगरों का रुख करते उनकी कहानी झकझोड़ देने वाली है l उन्होंने बाते की जो परिवार अपनी जवान बच्चियों के साथ बड़े शहरों में जाते है उनके सामने अपनी बच्चियों और पत्नियों की सुरक्षा की बड़ी ज़िम्मेदारी होती हैl कुछ युवतियां गरीबी और बुखे पेट के हाटों मजबूर होकर स्वयं इन् लोगो के साथ चली जाती है की ,यह सोच कर कि साथ जाकर इन्हें दो वक़्त का खाना तो नसीब होगा l

कौन लगाएगा इनके ज़ख्मों पर मलहम ?
जल मंच के इस अध्ययन से बुन्देलखंड की जो तस्वीर सामने आती है वह बहुत भयानक है ,लेकिन उन लोगो को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता जो इस हालात के ज़िम्मेदार है l इलेक्शन के वक़्त वोट के लालच में राजनितिक पार्टियां ज़रूर बुंदेलखंड का रुख करेंगी और और चुनाव के बाद इस नाम का कोई शहर भी है यह भूल जायेगी l ऐसे में इन हालत के मारों का कोई सहारा नहीं है l

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