BSNL 4G Services : 3 साल पहले 70 हजार करोड़, अब 1.6 लाख करोड़ और, BSNL-MTNL की कंगाली का चक्कर है क्या?

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BSNL 4G Services : 3 साल पहले 70 हजार करोड़, अब 1.6 लाख करोड़ और, BSNL-MTNL की कंगाली का चक्कर है क्या?

नई दिल्ली : इस समय देश में 5जी स्पेक्ट्रम के लिए नीलामी ( 5G Spectrum Auction) चल रही है। रिलायंस जियो (Reliance Jio), एयरटेल (Airtel), वोडाफोन आइडिया (VI) और अडाणी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) इस नीलामी में भाग ले रही हैं। स्पेक्ट्रम नीलामी का आज गुरुवार को तीसरा दिन है। कंपनियां स्पेक्ट्रम के लिए जमकर बोलियां लगा रही हैं। पहले दिन 1.45 लाख करोड़ रुपये की बोलियां आईं, तो दूसरे दिन 1.49 लाख करोड़ रुपये की बोलियां आईं। लेकिन इस बीच सरकारी टेलीकॉम ऑपरेटर भारत संचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल (BSNL) भी चर्चा में है। बीएसएनएल चर्चा में इसलिए है, क्योंकि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसके रिवाइवल के लिए 1.64 लाख करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी है। इस रिवाइवल पैकेज में बीएसएनएल के साथ ही एमटीएनएल भी शामिल है।

तीन साल पहले दिये थे 70,000 करोड़

बीएसएनएल के लिए सरकार का रिवाइवल पैकेज कोई नया नहीं है। तीन साल पहले भी ऐसे ही रिवाइवल पैकेज की घोषणा हुई थी। तीन साल पहले सरकार द्वारा बीएसएनएल के लिए 70,000 करोड़ रुपये का रिवाइवल पैकेज लाया गया था।

प्राइवेट प्लेयर्स के साथ प्रतिस्पर्धा क्यों नहीं कर पाई बीएसएनएल?

बीएसएनएल के पिछड़े रहने के पीछे तीन प्रमुख वजह सरकारी दखल, लाल फीताशाही और स्पेक्ट्रम नीलामी में भाग नहीं लेना है। बीएसएनएल साल 2000 में आई थी। उस समय इसमें भारत सरकार की 100 फीसदी हिस्सेदारी थी। यह दूरसंचार विभाग के नियंत्रण में रही। समय पर जरूरी सरकारी मंजूरियां नहीं मिलने के चलते यह निजी ऑपरेटर्स से पिछड़ती चली गई। वहीं, साल 2006 से 2012 की अवधि में इस कंपनी में लाला फीताशाही काफी अधिक देखने को मिली। बीएसएनएल में टेंडर की प्रक्रिया पूरे होने में ही महीनों लग जाते थे। इस अवधि में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी में गिरावट आई और प्राइवेट प्लेयर काफी आगे निकल गए। नेटवर्क और अन्य कई समस्याओं के चलते ग्राहक परेशान रहने लगे और उन्होंने निजी कंपनियों का रुख किया। साल 2010 में जब 3जी स्पेक्ट्रम की नीलामी हुई, तो सरकारी कंपनी होने की वजह से बीएसएनएल ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। साल 2016 में 4जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के समय भी बीएसएनएल को बाहर रखा गया।

एक वक्त था जब सिम के लिए लगती थीं लंबी लाइनें
बीएसएनएल की मोबाइल सेवा 19 अक्टूबर 2002 को शुरू हुई थी। कंपनी ने जब मोबाइल सेवा शुरू की, तो आसानी से सिम कार्ड नहीं मिल पाता था। बीएसएनएल की सिम पाने के लिए उस समय तीन-चार किलोमीटर लंबी लाइन लगती थी। लॉन्च के कुछ समय बाद ही बीएसएनएल देश की नंबर एक मोबाइल सेवा बन गई थी। एमटीएनएल मुंबई और दिल्ली में अपनी सेवाएं देती थीं। आज हालत यह है कि निजी कंपनियां 5जी स्पेक्ट्रम के लिए लाइन में लगी हैं और बीएसएनएल अभी तक 4जी सेवाएं भी लॉन्च नहीं कर पाई हैं। साल 2016 में 4जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के समय बीएसएनएल को बाहर रखा गया था।

4जी सेवाओं के लिए BSNL को मिलेगा स्पेक्ट्रम

सरकार अब बीएसएनएल को 4जी सेवाओं की पेशकश करने के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित करेगी। इसके तरह 900/1800 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम का आवंटन इक्विटी निवेश के जरिये किया जाएगा, जिसकी लागत 44,993 करोड़ रुपये होगी। दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी दी है। कंपनी इस साल के आखिर तक देश में 4जी सेवाएं लॉन्च कर सकती है। बीएसएनएल रिवाइवल पैकेज के तीन हिस्से हैं। इनमें सेवाओं में सुधार, बहीखातों को मजबूत करना और फाइबर नेटवर्क का विस्तार शामिल है। इसके अलावा बीएसएनएल के 33,000 करोड़ रुपये के वैधानिक बकाए को इक्विटी में बदला जाएगा। साथ ही कंपनी इतनी ही राशि के बैंक कर्ज के भुगतान के लिए बॉन्ड जारी करेगी।

देश के सभी गांवों तक पहुंचेगा 4जी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के सभी गांवों तक 4जी मोबाइल सेवाएं पहुंचाने के लिए एक प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है। यह काम यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (Universal Service Obligation Fund) के जरिए किया जाएगा। इस पर करीब 26,316 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
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BSNL और BBNL के मर्जर को हरी झंडी

केंद्रीय कैबिनेट ने बीएसएनएल और भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड (BBNL) के मर्जर को भी हरी झंडी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस मर्जर से बीबीएनएल के 5.67 लाख किलोमीटर के ऑप्टिकल फाइबर का पूरा कंट्रोल बीएसएनएल के हाथों में आ जाएगा।

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