गुरूवार, 15 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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बोकारो स्टील प्लांट: नौकरी की मांग पर आंदोलन तेज़, 106 विस्थापित युवा भूख हड़ताल पर

झारखंड के बोकारो स्टील प्लांट (BSL) की स्थापना के लिए अपनी ज़मीन देने वाले विस्थापित परिवारों के युवाओं का आंदोलन तेज़ हो गया है। स्थायी नौकरी और एक स्पष्ट नियोजन नीति की मांग को लेकर 106 प्रशिक्षि…

बोकारो स्टील प्लांट: नौकरी की मांग पर आंदोलन तेज़, 106 विस्थापित युवा भूख हड़ताल पर
(फोटो: IANS)

झारखंड के बोकारो स्टील प्लांट (BSL) की स्थापना के लिए अपनी ज़मीन देने वाले विस्थापित परिवारों के युवाओं का आंदोलन तेज़ हो गया है। स्थायी नौकरी और एक स्पष्ट नियोजन नीति की मांग को लेकर 106 प्रशिक्षित युवा पिछले छह दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार को प्लांट के दो गेट अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिए हैं और चेतावनी दी है कि मांगें न माने जाने पर उत्पादन भी ठप किया जा सकता है।

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यह पूरा विरोध प्रदर्शन 'विस्थापित नौजवान संघर्ष मोर्चा' के बैनर तले हो रहा है। आंदोलनकारी युवा प्लांट परिसर के पास स्थित टू-टैंक गार्डन में भूख हड़ताल कर रहे हैं। प्रदर्शन के उग्र होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में तीन पालियों में मजिस्ट्रेट तैनात कर दिए हैं। वहीं, भूख हड़ताल पर बैठे कुछ युवाओं की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल भी भेजा गया है।

क्या हैं आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें?

प्रदर्शनकारियों की तीन प्रमुख मांगें हैं। पहली, विस्थापित अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं में से 1,500 युवाओं को नियमित नियुक्ति दी जाए। दूसरी, चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में पहले से लागू आरक्षण व्यवस्था को फिर से बहाल किया जाए। और तीसरी, विस्थापित परिवारों के लिए एक स्पष्ट और ठोस रोज़गार नीति बनाई जाए। आंदोलन से जुड़े नेता सुनील कुमार ने कहा कि युवाओं को सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं, जबकि उन्हें स्थायी नौकरी के बजाय ठेके पर काम करने को कहा जाता है।

प्रबंधन और प्रशासन की चिंता

आंदोलन के तेज़ होने के साथ ही बीएसएल प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है। प्लांट के सुरक्षा विभाग ने प्रशासन को पत्र लिखकर आगाह किया है कि इस विरोध प्रदर्शन से संयंत्र के उत्पादन और औद्योगिक सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। इसमें कोक ओवन से लेकर सीआरएम जैसी इकाइयों के कामकाज पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई गई है।

मोर्चा के अध्यक्ष अरुण कुमार महतो ने आरोप लगाया कि प्रबंधन उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा, "विस्थापित परिवारों ने प्लांट की स्थापना के लिए अपनी जमीन दी, लेकिन उनके आश्रितों को रोजगार के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।" उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई ठोस पहल नहीं हुई तो प्लांट का कामकाज रोकने की कोशिश की जाएगी। फिलहाल, प्रदर्शनकारियों और प्रबंधन के बीच गतिरोध कायम है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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