शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
अपराध

हाउसिंग सोसाइटी घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, संस्थापक की ₹103 करोड़ की संपत्ति और रोल्स रॉयस-पोर्शे जैसी गाड़ियां जब्त

केरल और तमिलनाडु में एक बड़े कथित हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी कर 103 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला भारत लझना…

हाउसिंग सोसाइटी घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई, संस्थापक की ₹103 करोड़ की संपत्ति और रोल्स रॉयस-पोर्शे जैसी गाड़ियां जब्त
(फोटो: IANS)

केरल और तमिलनाडु में एक बड़े कथित हाउसिंग सोसाइटी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी कर 103 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला भारत लझना मल्टी-स्टेट हाउसिंग कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (BLMSHCS) और इसके संस्थापक आर. प्रेमकुमार से जुड़ा है, जिन पर जनता के पैसे का गबन कर निजी संपत्ति बनाने का आरोप है।

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ईडी के कोच्चि जोनल कार्यालय ने 4 नवंबर को धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत यह कार्रवाई की। केरल के एर्नाकुलम, कोझिकोड, त्रिशूर, तिरुवनंतपुरम, मुन्नार और तमिलनाडु के चेन्नई समेत कुल 12 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए। एजेंसी ने इस दौरान कई लग्जरी गाड़ियां, सोना और शेयर जब्त किए हैं।

क्या हैं संस्थापक पर आरोप?

इस पूरे मामले की जांच केरल पुलिस द्वारा दर्ज एक FIR के आधार पर शुरू हुई थी। FIR में आरोप लगाया गया था कि सोसाइटी के संस्थापक सदस्य और वास्तविक सीएमडी आर. प्रेमकुमार ने जमाकर्ताओं से मिले करोड़ों रुपयों को अपने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दिया। इस पैसे का इस्तेमाल निजी संपत्ति खरीदने में किया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सोसाइटी की संपत्तियों को गिरवी रखकर लिए गए कर्ज का पैसा भी निजी लाभ के लिए इस्तेमाल हुआ। FIR में अपराध से हुई कमाई का शुरुआती अनुमान लगभग 80 करोड़ रुपये लगाया गया था।

जांच में हुआ बड़ा खुलासा

ईडी की जांच में यह बात सामने आई कि आर. प्रेमकुमार और उनके सहयोगी लगभग 320 बैंक खातों का संचालन कर रहे थे। इन खातों के जरिए पैसों को कई स्तरों पर घुमाया गया ताकि उसके असली स्रोत को छिपाया जा सके। जांच में यह भी पता चला कि सोसाइटी के सार्वजनिक धन का इस्तेमाल व्यक्तिगत लाभ के लिए चल और अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया था। छापेमारी के दौरान यह भी पाया गया कि प्रेमकुमार अब भी सक्रिय रूप से सोसाइटी का कामकाज नियंत्रित कर रहे थे और कई कानूनी दस्तावेजों पर दस्तखत भी कर रहे थे। ईडी का मानना है कि बैंक खातों की जांच से संकेत मिलता है कि गबन की गई रकम सैकड़ों करोड़ रुपये हो सकती है, जिसकी सटीक राशि का पता लगाया जा रहा है।

क्या-क्या हुआ जब्त?

छापेमारी के दौरान ईडी ने कई कीमती चीजें जब्त या फ्रीज की हैं, जिनका कुल मूल्य 103 करोड़ रुपये आंका गया है। इनमें शामिल हैं:

  • लग्जरी कारें: 8 गाड़ियां, जिनमें पोर्शे, रोल्स रॉयस, टोयोटा वेलफायर और मर्सिडीज जैसी कारें शामिल हैं (लगभग 7 करोड़ रुपये)।
  • सोना: 7,400 ग्राम सोने के आभूषण (करीब 9.6 करोड़ रुपये)।
  • शेयर और संपत्ति: 80 करोड़ रुपये के शेयर और 5 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां।
  • बैंक जमा: 1.86 करोड़ रुपये की बैंक जमा राशि।

एजेंसी ने कहा है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है, ताकि मनी लॉन्ड्रिंग के पूरे नेटवर्क और पैसे के अंतिम उपयोग का पता लगाया जा सके।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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