रविवार, 4 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

समान नागरिक संहिता (UCC) पर बंगाल में सियासी घमासान: भाजपा-VHP ने बताया महिला न्याय के लिए जरूरी, विपक्ष ने कहा- RSS का एजेंडा

पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर जहाँ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) इसे लैंगिक न्याय (gender justice) और महिलाओं के अधिकारों…

समान नागरिक संहिता (UCC) पर बंगाल में सियासी घमासान: भाजपा-VHP ने बताया महिला न्याय के लिए जरूरी, विपक्ष ने कहा- RSS का एजेंडा
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर जहाँ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) इसे लैंगिक न्याय (gender justice) और महिलाओं के अधिकारों के लिए एक आवश्यक कदम बता रहे हैं, वहीं तृणमूल कांग्रेस और सीपीआईएम जैसे विपक्षी दलों ने इसे आरएसएस का एजेंडा और प्रशासन पर एक और बोझ करार दिया है।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। भाजपा के प्रवक्ता आरपी सिंह ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि देशभर में बेटियों को धर्म या जाति के भेदभाव के बिना समान अधिकार मिलने चाहिए और एक से अधिक विवाह की प्रथा समाप्त होनी चाहिए। उन्होंने बताया, "दूसरे राज्यों जैसे मध्य प्रदेश ने भी यूसीसी से जुड़े बिल पास करके राष्ट्रपति को भेजे हैं। मंजूरी मिलते ही इसे उन राज्यों में लागू कर दिया जाएगा।"

भाजपा और VHP का समर्थन

पश्चिम बंगाल की मंत्री और भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बयान का समर्थन करते हुए कहा, "इस देश के हर नागरिक के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए। हर नियम और कानून हर नागरिक के लिए एक जैसे होने चाहिए।" वहीं, विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने इसे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि तलाक की वजहें उचित होनी चाहिए और पति की मृत्यु के बाद पत्नी को संपत्ति में हिस्सा मिलना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, "जेंडर जस्टिस सुनिश्चित करने और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए, पश्चिम बंगाल में भी एक यूसीसी होना चाहिए।"

विपक्ष का कड़ा विरोध

दूसरी तरफ, विपक्ष ने इस प्रस्ताव की तीखी आलोचना की है। सीपीआईएम के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने इसे आरएसएस का कार्यक्रम बताया। उन्होंने कहा, "यह उनका धर्म है, उनका कर्तव्य है। वह मुसलमानों को खत्म करने के आरएसएस प्रोग्राम का हिस्सा हैं तो अगर आरएसएस प्रोग्राम के मुख्यमंत्री इसे लागू नहीं करेंगे, तो कौन करेगा?" उन्होंने सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार लोकतंत्र को खत्म कर देगी।

तृणमूल कांग्रेस की सांसद डोला सेन ने सुवेंदु अधिकारी पर तंज कसते हुए कहा, "हमारे राज्य में प्रशासन पर जितनी कम टिप्पणी करें, उतना अच्छा है।" उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ममता बनर्जी की परियोजनाओं का नाम बदलकर चला रही है और बुलडोजर कार्रवाई से छोटे व्यापारियों की आजीविका को खतरे में डाल रही है।

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "आपके पास कोई ठोस जनहित का मुद्दा नहीं है। इसलिए जो योजना आपने पहले से बना रखी है, उसे पूरा कीजिए।" उन्होंने कहा कि सत्ता में भाजपा के दिन गिने-चुने रह गए हैं और देश ने उसे हटाने का मन बना लिया है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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