Bhopal: कोविड में अनाथ हुई वनिशा पाठक के पैरेंट्स की निशानी बच गई, अदार पूनावाला ने होम लोन के दिए 27.47 लाख रुपये

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Bhopal: कोविड में अनाथ हुई वनिशा पाठक के पैरेंट्स की निशानी बच गई, अदार पूनावाला ने होम लोन के दिए 27.47 लाख रुपये

Reported by Ramendra Singh | Edited by मुनेश्वर कुमार | टाइम्सऑफइंडिया.कॉम | Updated: Dec 7, 2022, 2:14 PM

Adar Poonawalla Helps Bhopal Vanisha Pathak: कोविड काल में पैरेंट्स को खोने वाली वनिशा पाठक ने राहत की सांस ली है। सीरम इंस्टीट्यूट के अदार पूनावाला ने वनिशा का होम लोन चुका दिया है। इसके बाद वनिशा ने उनका शुक्रिया अदा किया है।

 

Bhopal: कोविड में अनाथ हुई वनिशा पाठक के पैरेंट्स की निशानी बच गई, अदार पूनावाला ने होम लोन के दिए 27.47 लाख रुपये
कोविड काल में अपने पैरेंट्स को खोने वाली वनिशा पाठक अब राहत की सांस ले सकती है। उसका घर अब उसका ही रहेगा। छात्रा ने कोविड में अपने माता-पिता को खोने के बाद 10वीं बोर्ड की परीक्षा में 99.8 फीसदी मार्क्स लाए थे। वनिशा भोपाल में टॉप की थी। पैरेंट्स के जाने के बाद ईएमआई का भुगतान न करने के लिए बैंक की तरफ से बार-बार नोटिस मिल रहे थे। साथ ही ईएमआई न चुकाने पर घर पर कब्जा के लिए नोटिस मिल रहा था। वनिशा ने पत्र के माध्यम से बैंकों से कुछ दिन की राहत मांगी थी। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे लेकर रिपोर्ट की थी। इसके बाद समर्थन में कई लोग आगे आए थे।

कई लोगों ने की मदद की पेशकश

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टीओआई में खबर आने के बाद कई लोग वनिशा की मदद के लिए आगे आए थे। सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला सहित कई लोगों ने होम लोन का भुगतान करने की पेशकश की लेकिन यह कानूनी मुद्दों में उलझ गया क्योंकि वनिशा 18 साल की नहीं थी। साथ ही कागज पर उसका कोई कानूनी अभिभावक नहीं था। यहां तक कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी मामले पर ध्यान दिया था और एलआईसी को इस मामले को देखने को कहा था। वनिशा पाठक के पिता ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से होम लोन लिया था।

अदार पूनावाला ने चुकाया होम लोन

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इसी साल नवंबर महीने में वनिशा पाठक 18 साल की हो गई है। अब सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ साइरस पूनावाला, सीईओ विल्लू पूनावाला फाउंडेशन और अदार पूनावाला ने उसे होम लोन चुकाने के लिए 27.47 लाख रुपये दिए हैं। विल्लू पूनावाला फाउंडेशन के सीईओ जसविंदर नारंग ने कहा कि यह पहल सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ साइरस पूनावाला और हमारे सीईओ अदार पूनावाला ने संयुक्त रूप से की थी। वे बहुत ही भावनात्मक लोग हैं। वे चाहते हैं कि ये बच्चे अब अपनी शिक्षा पर ध्यान दें और बिल्कुल तनाव मुक्त रहें। मैं पूरी प्रक्रिया के दौरान परिवार के साथ लगातार संपर्क में था।

वनिशा और उसके परिवार ने कहा शुक्रिया

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वहीं, वनिशा पाठक ने कहा कि घर बचाने में सहयोग करने के लिए मैं आदर पूनावाला जी की शुक्रगुजार हूं। माता-पिता के खोने के बाद यही हमारे पास आखिरी चीज थी। हम उनकी मदद के लिए आभारी रहेंगे। वनिशा पाठक अब 12वीं में है। वनिशा और उसका भाई मामा-मामी के साथ रहती है। प्रोफेसर अशोक शर्मा और भावना शर्मा दोनों की देखरेख करते हैं, जिन्हें हाल ही में भोपाल की एक अदालत से बच्चों की कानूनी संरक्षकता मिली है। प्रोफेसर शर्मा ने कहा कि हम पूनावाला जी की मदद के लिए आभारी हैं। मदद के लिए हमारे पास शब्द नहीं हैं।

घर बच जाने से दोनों बच्चे खुश

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मामी भावना शर्मा ने कहा कि ऐसे लोगों ने एक मिसाल कायम की है कि अच्छे लोग समाज में बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हम उन सभी का शुक्रगुजार हैं कि जिन्होंने दोनों बच्चों की मदद करने में दिलचस्पी दिखाई। हम बच्चों की देखभाल कर रहे हैं और उन्हें सर्वश्रेष्ठ जीवन दे रहे हैं जो हम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों बच्चे घर बच जाने से बहुत खुश हैं। गौरतलब है कि टीओआई ने पहली बार अगस्त 2021 में वनिशा के बारे में रिपोर्ट की थी, जब वह दसवीं कक्षा में सीबीएसई टॉपर बनी थी और उसने एक कविता लिखी थी कि मैं तुम्हारे बिना लंबा खड़ा रहूंगा, पापा।

वनिशा के पिता थे एलआईसी एजेंट

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दरअसल, वनिशा पाठक के पिता एलआईसी एजेंट थे और उन्होंने घर के लिए ऑफिस से कर्ज लिया था। मां-पिता दोनों का निधन हो गया और वनिशा नाबालिग थी, इसलिए एलआईसी ने उनकी सभी बचत और कमीशन को रोक दिया था जो उसे हर महीने मिलता था। वनिशा ने कई बार अधिकारियों को कर्ज चुकाने के लिए समय देने के लिए लिखा था क्योंकि वह 17 साल की थी लेकिन दूसरे छोर से चुप्पी थी। इसके बजाए उसे अपने पिता के नाम पर बकाया भुगतान करने या कानूनी कार्रवाई का सामाना करने के लिए तैयार रहने के नोटिस मिलने शुरू हो गए थे। उसे आखिरी नोटिस दो फरवरी 2022 को मिला था। वनिशा के माता-पिता की मई 2021 में कोविड की दूसरी लहर के दौरान निधन हो गया था।

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