सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भविष्य के युद्धों की चुनौती: रक्षा मंत्री ने कहा- चेतावनी का समय बहुत कम मिल सकता है

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भविष्य के युद्धों की प्रकृति को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही है। उनके अनुसार, आने वाले समय में होने वाले संघर्षों के लिए तैयारियों या चेतावनी का समय बहुत कम मिल सकता है…

भविष्य के युद्धों की चुनौती: रक्षा मंत्री ने कहा- चेतावनी का समय बहुत कम मिल सकता है
(फोटो: IANS)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भविष्य के युद्धों की प्रकृति को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही है। उनके अनुसार, आने वाले समय में होने वाले संघर्षों के लिए तैयारियों या चेतावनी का समय बहुत कम मिल सकता है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि अचानक उत्पन्न होने वाली परिस्थितियां और युद्ध में तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल हमारी सैन्य तैयारियों की गंभीर परीक्षा ले सकते हैं।

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नई दिल्ली में सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे युद्ध हमारी रसद व्यवस्था और आपूर्ति तंत्र की क्षमता को भी परखेंगे। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सैन्य अभियान जारी रखने के लिए रसद व्यवस्था को मजबूत बनाना अनिवार्य है।

'भारत राईस' की शुरुआत

इसी क्रम में, भारतीय सेना के लिए 'भारत राईस' की शुरुआत की गई। यह पहल भारतीय सेना और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के बीच एक समझौते के तहत हुई है। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा, "'भारत राईस' की शुरुआत केवल चावल से जुड़ी पहल नहीं है। यह उस विश्वास का प्रतीक है, जो किसान के खेत से शुरू होकर सैनिक की भोजन की थाली तक पहुंचता है।" उन्होंने आगे कहा कि यह उस सामूहिक संकल्प को दर्शाता है, जिसमें किसान का परिश्रम सैनिक की शक्ति बनता है।

सैनिकों का कल्याण और मनोबल

रक्षा मंत्री ने सैनिकों के कल्याण को राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अभिन्न अंग बताया। उन्होंने कहा, "जब हम चैन की नींद सोते हैं, तब हमारे सैनिक यह सुनिश्चित कर रहे होते हैं कि देश की सीमाओं से कोई खतरा हमारे घरों तक न पहुंचे।" उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सीमा पर तैनात जवानों को यह विश्वास होना चाहिए कि पूरा देश उनके पीछे खड़ा है। राजनाथ सिंह के अनुसार, "हमारे सैनिकों का मनोबल हमारी प्राथमिकता है।"

दोहरे उपयोग की व्यवस्था

इस समझौते की एक खास बात यह है कि इसके तहत आपातकालीन सैन्य परिस्थितियों में भारतीय सेना FCI के निर्धारित भंडारण केंद्रों और संसाधनों का उपयोग कर सकेगी। इसे 'दोहरे उपयोग की व्यवस्था' कहा गया है, जिसका अर्थ है कि देश के बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल नागरिक और सैन्य, दोनों तरह की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जा सकेगा। रक्षा मंत्री ने आशा जताई कि सेना और FCI का यह सहयोग भविष्य में नए आयाम स्थापित करेगा।

राजनाथ सिंह ने 'भारत राईस' की गुणवत्ता और पैकेजिंग पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाला चावल तय मानकों पर उपलब्ध होगा और पैकेटों की बनावट को भी उपयोग में आसान बनाया जा रहा है, जिससे दुर्गम क्षेत्रों में राशन पहुंचाने वाले जवानों को सुविधा होगी। उन्होंने इस पहल को 'जय जवान, जय किसान' की भावना को साकार करने वाला बताया।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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