उत्तर प्रदेश: भदोही जिले को फिर मिली संत रविदास की पहचान, योगी कैबिनेट ने नाम बदला
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले का नाम एक बार फिर बदल गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जिले के नाम में 'संत रविदास' को फिर से जोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई…
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले का नाम एक बार फिर बदल गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जिले के नाम में 'संत रविदास' को फिर से जोड़ने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। अब यह जिला 'संत रविदासनगर भदोही' के नाम से जाना जाएगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले में संत रविदास के सम्मान के साथ-साथ भदोही की ऐतिहासिक पहचान को भी कायम रखा गया है।
शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने इस फैसले की जानकारी दी। सरकार ने बताया कि यह निर्णय भारतीय संत परंपरा और सामाजिक सुधार में संत रविदास के महान योगदान को देखते हुए लिया गया है। इस कदम को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की संशोधित धारा 6(2) के तहत उठाया गया है, जो राज्य सरकार को किसी राजस्व क्षेत्र का नाम अधिसूचित करने का अधिकार देती है।
नाम बदलने का राजनीतिक इतिहास
भदोही जिले के नामकरण का एक लंबा राजनीतिक इतिहास रहा है। सबसे पहले 1997 में तत्कालीन मायावती सरकार ने जिले का नाम 'संत रविदास नगर' किया था। इसके बाद 2014 में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सरकार ने इसे बदलकर सिर्फ 'भदोही' कर दिया था। अब योगी सरकार ने एक बार फिर नाम में संत रविदास को शामिल कर लिया है।
सामाजिक और राजनीतिक मायने
इस फैसले के राजनीतिक मायने भी देखे जा रहे हैं। संत रविदास दलित समाज के लिए आस्था के एक बड़े प्रतीक हैं, जबकि 'भदोही' नाम को भार राज की ऐतिहासिक विरासत से जोड़ा जाता है, जिससे राजभर समाज अपनी पहचान जोड़ता है। नए नाम 'संत रविदासनगर भदोही' में दोनों ही शब्दों को जगह देकर इसे दलित और राजभर, दोनों समुदायों को साधने के एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम दोनों समुदायों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने का एक राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।
इनपुट: IANS



