‘तरंग शक्ति 2026’ अभ्यास के बीच 28 देशों के वायुसेना प्रमुखों ने देखी तेजस की ताकत, HAL ने दी अहम जानकारी
भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति 2026' में शामिल 28 मित्र देशों के वायुसेना प्रमुखों और वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को बेंगलुरु पहुँचा। समाचार…
भारतीय वायुसेना के सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास 'तरंग शक्ति 2026' में शामिल 28 मित्र देशों के वायुसेना प्रमुखों और वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को बेंगलुरु पहुँचा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यहाँ उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के एलसीए तेजस डिवीजन का दौरा किया और भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम की प्रगति का जायजा लिया।
इस दौरे में इंडोनेशिया, थाईलैंड, ब्राजील, पेरू, अल्जीरिया, नाइजीरिया, आइवरी कोस्ट और मालदीव जैसे देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल थे। एचएएल के सीएमडी डॉ. डीके सुनील और तेजस डिवीजन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इन सभी का स्वागत किया। कंपनी ने इस दौरे को दुनिया भर की वायुसेनाओं का संगम बताया।
तेजस की क्षमता और आत्मनिर्भर भारत
दौरे पर आए प्रतिनिधियों को एचएएल ने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके1, उन्नत तेजस एमके1ए और भविष्य के तेजस एमके2 कार्यक्रम की प्रगति पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। इसके बाद उन्हें तेजस की प्रोडक्शन लाइन, फाइनल असेंबली हैंगर और फ्लाइट टेस्टिंग सुविधाओं को भी दिखाया गया।
एचएएल के अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि तेजस सिर्फ एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भर भारत अभियान का प्रतीक भी है। इसमें 65 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है और इसके विश्व स्तरीय एवियोनिक्स इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक मजबूत प्रतिस्पर्धी बनाते हैं।
वैश्विक बाजार और रक्षा निर्यात पर नजर
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब इंडोनेशिया, ब्राजील और नाइजीरिया जैसे कई देश अपने पुराने लड़ाकू विमानों के बेड़े को बदलने के लिए किफायती और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। इन देशों के लिए तेजस एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से भारत के रक्षा निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है और तेजस को वैश्विक बाजार में नई पहचान हासिल करने में मदद मिलेगी।
इंजन आपूर्ति में आएगी तेजी
तेजस एमके1ए कार्यक्रम के लिए इंजन की आपूर्ति में भी तेजी आने की उम्मीद है। एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026 में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के एक बयान के अनुसार, जीई एयरोस्पेस से इंजनों की डिलीवरी साल की अंतिम तिमाही में काफी बढ़ने की उम्मीद है। एचएएल को अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच 12 अतिरिक्त जीई एफ404-आईएन20 इंजन मिल सकते हैं, जिससे भारतीय वायुसेना के लिए विमानों का उत्पादन तेज हो सकेगा। कंपनी पहले ही 10 इंजन सप्लाई कर चुकी है, और इस साल के अंत तक कुल 22 इंजन मिलने की संभावना है।
इनपुट: IANS



