बुधवार, 4 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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बेलगावी: गन्ना किसानों का प्रदर्शन निर्णायक मोड़ पर, सरकार से छठी गारंटी की मांग

कर्नाटक के बेलगावी में गन्ना किसानों का विरोध-प्रदर्शन निर्णायक दौर में पहुँच गया है। अपनी मांगों को लेकर किसान अब डीसी दफ्तर के सामने ही खाना बनाकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS…

बेलगावी: गन्ना किसानों का प्रदर्शन निर्णायक मोड़ पर, सरकार से छठी गारंटी की मांग
(फोटो: IANS)

कर्नाटक के बेलगावी में गन्ना किसानों का विरोध-प्रदर्शन निर्णायक दौर में पहुँच गया है। अपनी मांगों को लेकर किसान अब डीसी दफ्तर के सामने ही खाना बनाकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, किसानों के इस आंदोलन के बीच प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली और एडिशनल डीसी के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है।

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किसानों की नाराज़गी का एक बड़ा कारण मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का हालिया बयान है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकारी खजाने में पैसे नहीं हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए किसान नेता गणेश इलिगर ने कहा कि अगर राज्य सरकार गारंटी योजनाओं के लिए कर्ज ले सकती है, तो उसे गन्ना किसानों के लिए भी 'छठी गारंटी' घोषित करनी चाहिए।

क्या हैं किसानों की मुख्य मांगें?

किसान कई मोर्चों पर सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि 2026-27 के पेराई सीजन के लिए गन्ने की कीमत बढ़ाई जाए और राज्य स्तर पर बेहतर वित्तीय मदद मिले। किसानों की कुछ प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • गन्ने का मूल्य: किसानों की मांग है कि उन्हें प्रति टन गन्ने के लिए 5,500 रुपए दिए जाएं, जिसमें केंद्र द्वारा तय कीमत के ऊपर राज्य का बोनस भी शामिल हो।
  • चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP): वे चाहते हैं कि केंद्र सरकार चीनी का MSP 31 रुपए प्रति किलो से बढ़ाकर 60 रुपए प्रति किलो करे। एक अन्य विकल्प के तौर पर उन्होंने 6,000 रुपए प्रति क्विंटल का न्यूनतम बिक्री मूल्य तय करने का सुझाव दिया है। किसानों का तर्क है कि चीनी का MSP फरवरी 2019 से नहीं बदला है, जिसके चलते मिलें उन्हें बेहतर दाम नहीं दे पा रही हैं।

किसान नेता गणेश इलिगर के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी बेलगावी डीसी दफ्तर के सामने जमा हैं, जहाँ इस मुद्दे के समाधान के लिए एक अहम बैठक होनी है। गन्ने को एक नकदी फसल माना जाता है, क्योंकि इसकी खेती सीधे बाजार में बेचकर मुनाफा कमाने के लिए की जाती है, जिससे किसानों को तत्काल आमदनी होती है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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