आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, इन राज्यों से आई बुरी खबर

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साल के अंत में तीन राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने है. चुनावों लेकर सभी पार्टिया अपना पूरा जोर लगा रही है. जहा भाजपा तीनों राज्यों में सत्ता पर सवार है तो वही कांग्रेस इस बार सत्ता में वापसी करने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती है. हर पार्टी चुनाव में जीतने के लिए नए-नए तरीके अपना रहा है. लेकिन इसी बीच कांग्रेस के लिए बुरी खबर आई है. कांग्रेस की गठबंधन की उम्मीदों पर पानी फिर गया है. जहा मध्य प्रदेश में मायावती ने कांग्रेस के अरमानो को दरकिनार कर दिया है वही छत्तीसगढ़ में अजित जोगी ने बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन करने का फैसला कर लिया है. अजित जोगी छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके है.

बसपा-कांग्रेस के गठबंधन को लगा बड़ा झटका, बसपा ने जारी की अपने प्रत्याशियों की सूची

मध्य प्रदेश में चुनाव आने से पहले कांग्रेस और बसपा के एक साथ चुनाव में उतरने की खबरे जोरों पर आ रही थी. लेकिन चुनाव आने से एक-दो महीने पहले ही इन खबरों पर पूर्ण विराम लग गया है. बसपा मध्य प्रदेश में अपने दम पर चुनाव लड़ेगी. पार्टी ने तो अपने प्रत्याशीयों की सूची भी जारी कर दी है. ऐसें में सत्ता में वापसी करने की सोच रही कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका लगा है. बता दे पिछली बार चुनाव में BSP को प्रदेश में 7 फीसदी वोट मिले थे ऐसे में कांग्रेस की कोशिश थी कि बसपा और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी जैसे दलों से गठजोड़ कर भाजपा को रोका जाए. लेकिन इस गठबंधन के परवान चढ़ने से पहले ही भाजपा ने इसे रोक दिया है.

वही भाजपा के लिए यह खबर राहत लेकर आई है क्यूंकि बसपा की मध्य प्रदेश में कुछ सीटों पर पकड़ है. जिसे लेकर भाजपा काफी चिंतित भी थी. ऐसें में भाजपा ने अपनी सियासती बढ़त बना ली है.

छत्तीसगढ़ में भी जोगी-मायावती ने छोड़ा कांग्रेस का हाथ

विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे अजीत जोगी का कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाना, कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका था. और अब बसपा ने भी अजीत जोगी की पार्टी से गठबंधन की घोषणा की है. जाहिर है आदिवासी बहुल प्रदेश की यह नई जुगलबंदी कांग्रेस की ही उलझन बढ़ाएगी.

कांग्रेस की नाक के नीचे दो प्रदेशों में हुआ यह घटनाक्रम बता रहा है कि राहुल भले ही पूरे जोश से घूम रहे हों और अपनी पार्टी को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन चुनावी कूटनीति में उनकी पार्टी अभी से नाकाम होने लगी है.

अब तो आने वाला समय ही बताएगा की किस पार्टी की रणनीति कितनी कारगर साबित होगी. लेकिन फिलहाल राजनितिक पार्टिया अपने वर्चस्व और सत्ता में रहने/पाने के लिए अपना पूरा जोर लगा रही है.