सोमवार, 28 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश

बाराबंकी: सरयू के रौद्र रूप से सदियों पुरानी धरोहरें ख़तरे में, 150 साल पुरानी मस्जिद नदी में समाई

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में सरयू-घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से भारी कटान हो रहा है, जिससे सूरतगंज ब्लॉक इलाके में स्थिति गंभीर हो गई है। नदी के तेज बहाव ने किनारे की ज़मीन को निगलना शुरू कर दिया है…

बाराबंकी: सरयू के रौद्र रूप से सदियों पुरानी धरोहरें ख़तरे में, 150 साल पुरानी मस्जिद नदी में समाई
(फोटो: IANS)

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में सरयू-घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से भारी कटान हो रहा है, जिससे सूरतगंज ब्लॉक इलाके में स्थिति गंभीर हो गई है। नदी के तेज बहाव ने किनारे की ज़मीन को निगलना शुरू कर दिया है, जिसके चलते कई परिवार अपने घर खाली कर सुरक्षित ठिकानों पर चले गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कटान की चपेट में आकर लगभग 150 साल पुरानी एक मस्जिद नदी में समा गई है।

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अब नदी की धारा 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास मंदिर के बेहद करीब पहुंच चुकी है, जिससे इसके अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि उनका मानना था कि सरयू की लहरें चाहे कितनी भी उग्र क्यों न हों, वे मंदिर को छूकर लौट जाती हैं। लेकिन इस बार का मंज़र काफी भयावह है।

साझी विरासत पर संकट

इस इलाके में मंदिर और मस्जिद महज 20 मीटर की दूरी पर स्थित थे, जो सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक थे। मस्जिद के नदी में समा जाने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग मंदिर की सुरक्षा के लिए दुआ कर रहे हैं। हाफिज मोहम्मद सादाब ने IANS से कहा, "मस्जिद और मंदिर दोनों काफी पुराने थे। अभी मस्जिद नदी में बाढ़ के कारण उसमें समा चुकी है। हम यह दुआ कर रहे हैं कि जो मंदिर अभी बचा हुआ है, वह सुरक्षित खड़ा रहे।" वहीं, हिंदू समुदाय के लोगों को भी मस्जिद के चले जाने का गहरा अफ़सोस है।

प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

एक स्थानीय बुजुर्ग ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा, "प्रशासन पहले कार्य करवाया, इसमें प्रशासन की लापरवाही हुई, क्योंकि एक हफ्ता काम बंद रहा। अगर उसी बीच से काम चालू रहता तो आज मंदिर के नदी में समाने का खतरा नहीं रहता।” उन्होंने बताया कि अब तक 40 से 50 घर, एक हनुमान मंदिर और एक शिव मंदिर भी नदी की भेंट चढ़ चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मंदिर को बचाने की गुहार लगाई है।

बचाव के प्रयास जारी

जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम रामनगर आकांछा गुप्ता और तहसीलदार विपुल सिंह मौके पर बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं। बाढ़ खंड विभाग के अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह भी अपनी टीम के साथ पिछले एक हफ्ते से मंदिर को बचाने के लिए युद्ध स्तर पर जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया, "गिरजा बैराज में 3 लाख का डिस्चार्ज पास हो रहा है और शारदा बैराज में 1,57,000 का डिस्चार्ज है। इससे घाघरा का जलस्तर बढ़ा है। नदी इस समय अपनी पूरी गति से बह रही है।” महंत अजय दास के मुताबिक, कटान 10-12 दिन पहले शुरू हुआ था और जलस्तर दोबारा बढ़ने से स्थिति और बिगड़ गई।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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