बांके बिहारी मंदिर में दान-दक्षिणा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा — हर पैसा सीधे ख़ज़ाने में जाए
वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान और चढ़ावे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मंदिर को मिलने वाली हर एक…
वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान और चढ़ावे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मंदिर को मिलने वाली हर एक पाई सीधे मंदिर के ख़ज़ाने में ही जमा होनी चाहिए, जिसके लिए केवल निर्धारित दानपात्रों या ऑनलाइन माध्यमों का ही उपयोग किया जाएगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया में किसी भी सेवायत या अन्य व्यक्ति द्वारा किसी भी तरह की बाधा को गंभीरता से लिया जाएगा।
यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मंदिर के प्रबंधन से जुड़े एक विवाद की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने मंदिर की प्रबंधन समिति को दान स्वीकार करने के लिए पूरी तरह से पारदर्शी व्यवस्था बनाने और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाने का आदेश दिया है।
संपत्ति खरीद और प्रबंधन
अदालत ने मंदिर के धन के उपयोग को लेकर भी एक महत्वपूर्ण शर्त लगाई है। अब मंदिर के पैसों से कोई भी संपत्ति खरीदने से पहले, उस प्रस्ताव को लेन-देन पूरा होने से पूर्व अदालत के सामने प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। यह आदेश मंदिर के धन के प्रबंधन और संचालन की निगरानी के लिए समिति के गठन से संबंधित मामले का हिस्सा है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 'उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025' के माध्यम से मंदिर के प्रबंधन को एक वैधानिक ढांचे के तहत लाने का प्रयास किया था। इससे पहले मंदिर का संचालन 1939 में बनी एक प्रबंधन योजना के अनुसार होता था।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समिति
इससे पहले, अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति को भीड़ प्रबंधन, पेयजल, शौचालय और मंदिर परिसर के विकास जैसे कार्यों की निगरानी की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी।
इनपुट: IANS



