रविवार, 6 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
दुनिया

बलूचिस्तान: डॉक्टर की गिरफ़्तारी पर मानवाधिकार संस्था का आरोप — 'आवाज़ दबाने के लिए अघोषित मार्शल लॉ'

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली एक रिटायर्ड पुलिस सर्जन की गिरफ़्तारी ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार…

बलूचिस्तान: डॉक्टर की गिरफ़्तारी पर मानवाधिकार संस्था का आरोप — 'आवाज़ दबाने के लिए अघोषित मार्शल लॉ'
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली एक रिटायर्ड पुलिस सर्जन की गिरफ़्तारी ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख मानवाधिकार संस्था बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) ने डॉ. आयशा फ़ैज की गिरफ़्तारी की कड़ी निंदा करते हुए इसे क्षेत्र में "अघोषित मार्शल लॉ के बढ़ते दायरे" का सबूत बताया है।

विज्ञापन

काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) ने डॉ. फ़ैज को आतंकवाद-निरोधी अधिनियम (ATA) के तहत गिरफ़्तार किया है। स्थानीय मीडिया ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि यह कार्रवाई क्वेटा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हुई, जिसमें डॉ. फ़ैज ने बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री मीर सरफराज बुगती और राज्य के गृह मंत्री की आलोचना की थी। 'द बलूचिस्तान पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बलूचिस्तान की राजनीतिक स्थिति, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और हालिया घटनाओं पर अपनी बात रखी थी।

संस्था ने क्या आरोप लगाए?

बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक बयान जारी कर कहा कि बलूचिस्तान में अधिकारियों द्वारा असहमति की आवाज़ों को निशाना बनाया जा रहा है। संस्था ने आरोप लगाया, "बलूचिस्तान में सामूहिक सजा और बलूच नरसंहार का सिलसिला तेजी से और बिना रुके जारी है।"

BYC ने मस्तुंग में फलों के बागों को नष्ट किए जाने की घटना को 'सामूहिक सजा' का हिस्सा बताते हुए कहा, "इन अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने पर डॉ. आयशा फैज की गिरफ्तारी बलूचिस्तान में अघोषित मार्शल लॉ के बढ़ते दायरे को दिखाती है।" कमेटी ने ज़ोर देकर कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों की सामूहिक सजा देने, बागों को नष्ट करने और शांतिपूर्ण आवाज़ों को बलपूर्वक दबाने की नीति पूरी तरह अस्वीकार्य है।

सरकार पर दमन का आरोप

BYC ने आगे कहा कि डॉ. फ़ैज की गिरफ़्तारी यह दर्शाती है कि बलूचिस्तान के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर आवाज़ उठाने पर कितनी सख़्त पाबंदी है। संस्था के अनुसार, "जब भी कोई नागरिक इन अत्याचारों और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसे भी सरकारी ताकत का निशाना बनाया जाता है और सच बोलने व आवाज उठाने की सजा के तौर पर चुप करा दिया जाता है।" कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया कि वे "सरकारी बर्बरता और दमन के खिलाफ हर संभव तरीके से विरोध" जारी रखेंगे।

इनपुट: IANS

N

News4Social इंटरनेशनल डेस्क

News4Social इंटरनेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →