पुराने कानून खत्म करें राज्य, सुशासन के लिए उपराष्ट्रपति ने कानूनी सुधारों पर दिया जोर
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने देश में सुशासन को बढ़ावा देने के लिए राज्यों से पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को खत्म करने का आग्रह किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के…
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने देश में सुशासन को बढ़ावा देने के लिए राज्यों से पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को खत्म करने का आग्रह किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कानूनी सुधारों को बदलते समय के अनुरूप होना अनिवार्य है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने यह बात नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारतीय विधि आयोग द्वारा आयोजित एक समारोह में कही।
यह कार्यक्रम 'सहकारी संघवाद और विधिक सुधार: राष्ट्रीय एवं राज्य परिप्रेक्ष्य' विषय पर केंद्रित था। अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास को मजबूत कानूनों, पारदर्शी संस्थानों, कुशल प्रशासन और सभी के लिए न्याय से समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने 'विकसित भारत @2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने में इन सुधारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
सहकारी संघवाद और 'टीम इंडिया'
सीपी राधाकृष्णन ने सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली 'टीम इंडिया' की परिकल्पना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह परिकल्पना केंद्र और राज्यों के बीच परामर्श, समन्वय और साझा दायित्व की भावना को दर्शाती है। उनके मुताबिक, "व्यापक जनहित में मिलकर काम करने के मार्ग में राजनीतिक मतभेद कभी बाधा नहीं बनने चाहिए।"
उन्होंने भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी "विविधता में एकता" को बताते हुए कहा कि संविधान संघ की शक्ति और राज्यों की जिम्मेदारियों के बीच एक संतुलन बनाता है। उपराष्ट्रपति ने कहा, "भारतीय संघवाद की वास्तविक शक्ति विविधताओं का सम्मान करते हुए साझा राष्ट्रीय उद्देश्यों की दिशा में संयुक्त रूप से कार्य करने में निहित है।"
कानूनी आधुनिकीकरण की दिशा में कदम
उपराष्ट्रपति ने पिछले 12 वर्षों में 1,700 से अधिक पुराने कानूनों को निरस्त करने और औपनिवेशिक काल के तीन आपराधिक कानूनों को बदलने को भारत की कानूनी व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में एक अहम कदम बताया। उन्होंने राज्यों के विधि आयोगों से भी ऐसे पुराने कानूनों की पहचान कर उन्हें संशोधित करने या निरस्त करने की सिफारिश करने का आग्रह किया, ताकि जीवनयापन में सुगमता को बढ़ावा मिल सके।
उन्होंने तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर की शिक्षाओं का स्मरण करते हुए कहा कि सिर्फ सत्ता का प्रयोग नहीं, बल्कि सुशासन ही स्थायी सफलता और समृद्धि का आधार है। अंत में, उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सम्मेलन से एक नागरिक-केंद्रित कानूनी व्यवस्था बनाने के लिए ठोस सिफारिशें मिलेंगी।
इनपुट: IANS



