आयुर्वेद में शोध को मिलेगा नया बल, छात्रों के लिए 50,000 रुपये की फेलोशिप और पुरस्कारों की घोषणा
भारत में आयुर्वेद के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को एक नई दिशा देने के लिए दो बड़ी पहल शुरू की गई हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) ने छात्रों और…
भारत में आयुर्वेद के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को एक नई दिशा देने के लिए दो बड़ी पहल शुरू की गई हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) ने छात्रों और शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए 'स्पार्क 5.0' और 'आयुर्शोध 2026' कार्यक्रमों का शुभारंभ किया है। इन योजनाओं का मकसद आयुर्वेद में रिसर्च के इकोसिस्टम को मजबूत करना और युवा प्रतिभाओं को आगे लाना है।
NCISM की अध्यक्ष प्रो. मनीषा कोठेकर ने केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद (CCRAS) के इन कार्यक्रमों को लॉन्च किया। इनमें से एक कार्यक्रम सीधे तौर पर आयुर्वेद के स्नातक छात्रों (BAMS) के लिए है, जबकि दूसरा शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करने पर केंद्रित है।
छात्रों के लिए 'स्पार्क 5.0'
स्टूडेंटशिप प्रोग्राम फॉर आयुर्वेद रिसर्च केन (SPARK) का यह पांचवां संस्करण है, जिसे 2026-27 के लिए शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य बीएएमएस के छात्रों को शोध की बारीकियों और तकनीकों से परिचित कराना है। इस कार्यक्रम के तहत कुल 300 छात्रों को चुना जाएगा और प्रत्येक को स्वतंत्र शोध परियोजनाओं पर काम करने के लिए 50,000 रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी।
इस पहल से छात्रों में विश्लेषणात्मक सोच विकसित होगी और वे शोध को एक करियर विकल्प के रूप में देखने के लिए प्रेरित होंगे। NCISM और भारत सरकार से मान्यता प्राप्त कॉलेजों में तीसरे, चौथे और व्यावसायिक वर्ष के बीएएमएस छात्र इसके लिए पात्र होंगे। पंजीकरण 15 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 15 नवंबर 2026 तक चलेगा।
शोधकर्ताओं के लिए 'आयुर्शोध 2026'
यह पहल आयुर्वेद में पहले से हो रहे शोध कार्यों को मान्यता और प्रोत्साहन देने का एक मंच है। इसके तहत तीन अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे:
- सीसीआरएएस-प्रबोध: इसमें शोधकर्ताओं को अपनी थीसिस को 3 मिनट में प्रस्तुत करना होगा, जिससे उनके संचार कौशल का आकलन होगा।
- सीसीआरएएस-प्रकाश: यह पुरस्कार मूल अनुसंधान पर आधारित बेहतरीन प्रकाशनों को सम्मानित करने के लिए है।
- सीसीआरएएस-नवोन्मेष: इसके तहत नए प्रोटोटाइप, समाधान, प्रक्रियात्मक नवाचार और परिवर्तनकारी शोध पद्धतियों को मान्यता दी जाएगी।
इस कार्यक्रम के पुरस्कारों का विवरण एक सर्कुलर में दिया गया है, जिसमें श्री धूतपापेश्वर लिमिटेड द्वारा प्रायोजित पुरस्कार राशि भी शामिल है। 'सीसीआरएएस आयुर्शोध' का फाइनल 11 दिसंबर 2026 को होगा। इस लॉन्च कार्यक्रम में सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रो. रबीनारायण आचार्य और श्री धूतपापेश्वर लिमिटेड के सीईओ डॉ. रणजीत पुराणिक समेत कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
इनपुट: IANS



