शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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ऑस्ट्रेलिया: आप्रवासन विरोधी प्रदर्शनों से गरमाई राजनीति, 'वन नेशन' पार्टी को मिल रहा समर्थन

ऑस्ट्रेलिया में आप्रवासन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है, क्योंकि देश के कई प्रमुख शहरों में इसके खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। रविवार को ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ के बैनर तले जुटे…

ऑस्ट्रेलिया: आप्रवासन विरोधी प्रदर्शनों से गरमाई राजनीति, 'वन नेशन' पार्टी को मिल रहा समर्थन
(फोटो: IANS)

ऑस्ट्रेलिया में आप्रवासन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है, क्योंकि देश के कई प्रमुख शहरों में इसके खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। रविवार को ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ के बैनर तले जुटे प्रदर्शनकारियों ने बड़े पैमाने पर प्रवासन का कड़ा विरोध किया। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, आयोजकों का दावा है कि इन प्रदर्शनों ने देश में आप्रवासन-विरोधी राजनीति को एक नई गति दी है।

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इन प्रदर्शनों का राजनीतिक लाभ दक्षिणपंथी पार्टी 'वन नेशन' को मिलता दिख रहा है। राष्ट्रवादी समूह 'रिवाइव ऑस्ट्रेलिया' के संस्थापक ब्रायन मार्लो, जो सिडनी की रैली का नेतृत्व कर रहे थे, ने कहा कि अगस्त 2025 से शुरू हुए ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ आंदोलन ने लोगों को आप्रवासन और राष्ट्रीय पहचान जैसे मुद्दों पर एकजुट किया है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी उपचुनावों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के सीक्रेट उपचुनाव में 'वन नेशन' की जीत को इसी माहौल का परिणाम बताया।

सिडनी में रैली और सुरक्षा व्यवस्था

सिडनी के बेलमोर पार्क में आयोजित ‘फ्री स्पीच’ रैली में 300 से अधिक लोग शामिल हुए। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, जिसमें दंगा नियंत्रण दस्ते और घुड़सवार पुलिस सहित 70 से अधिक जवान शामिल थे। इसी दौरान, प्रदर्शनकारियों के विरोध में पास के हाइड पार्क में एक काउंटर-प्रोटेस्ट भी आयोजित किया गया।

'वन नेशन' पार्टी से मतभेद

हालांकि रैली में 'वन नेशन' के कई समर्थक मौजूद थे और कुछ ने पार्टी की टी-शर्ट भी पहनी हुई थी, लेकिन पार्टी और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ नीतियों को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आयोजकों ने अपने सोशल मीडिया मंचों पर हाल ही में 'वन नेशन' की नीतियों की आलोचना की है। सबसे बड़ा मतभेद प्रवासन की संख्या को लेकर है। 'वन नेशन' पार्टी जहां सालाना शुद्ध प्रवासन के लिए 1.30 लाख का लक्ष्य स्वीकार करने के संकेत दे रही है, वहीं रैली में शामिल कई लोग इससे कहीं अधिक सख्त नीतियों की मांग कर रहे थे। भीड़ ने ‘रीमाइग्रेशन’ (पुनः-प्रवासन) और बड़े पैमाने पर प्रवासन को पूरी तरह खत्म करने जैसे नारों का समर्थन किया।

स्पष्ट है कि ऑस्ट्रेलिया में आप्रवासन अब सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह रोजगार, आवास, जनसंख्या वृद्धि, सामाजिक सेवाओं और राष्ट्रीय पहचान जैसे गहरे सवालों से जुड़कर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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