गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भारत की मछली सब्सिडी पर अमेरिका को आपत्ति, कहा- हमारे मछुआरों को हो रहा नुकसान

अमेरिका ने भारत की मत्स्य पालन सब्सिडी नीति पर गंभीर चिंता जताई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) का कहना है कि इस सब्सिडी के कारण भारत के समुद्री खाद्य उत्पाद (सी-फूड) अमेरिकी बाजार में…

भारत की मछली सब्सिडी पर अमेरिका को आपत्ति, कहा- हमारे मछुआरों को हो रहा नुकसान
(फोटो: IANS)

अमेरिका ने भारत की मत्स्य पालन सब्सिडी नीति पर गंभीर चिंता जताई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) का कहना है कि इस सब्सिडी के कारण भारत के समुद्री खाद्य उत्पाद (सी-फूड) अमेरिकी बाजार में अनुचित रूप से कम कीमतों पर बिक रहे हैं, जिससे वहां के स्थानीय मछुआरों और पूरी सप्लाई चेन को नुकसान हो रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की 'अमेरिका फर्स्ट सीफूड स्ट्रैटेजी' के तहत उठाया गया है।

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USTR ने बुधवार को जारी एक बयान में भारत की सब्सिडी के साथ-साथ वियतनाम में अवैध, असूचित और अनियमित (IUU) मछली पकड़ने की गतिविधियों का भी उल्लेख किया। अमेरिकी कार्यालय ने कहा कि इन दोनों वजहों से उनके मछुआरों के लिए अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा हो रही है।

सब्सिडी से अमेरिकी बाज़ार पर क्या असर?

अमेरिकी पक्ष का आरोप है कि भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली व्यापक मत्स्य सब्सिडी की वजह से भारतीय उत्पादक अपने सी-फूड को लागत से भी कम दाम पर अमेरिका को निर्यात कर पाते हैं। 23 अक्टूबर को जारी एक रणनीति दस्तावेज़ में USTR ने स्पष्ट किया कि वह भारत के इन सब्सिडी कार्यक्रमों से जुड़ी चिंताओं पर काम करना जारी रखेगा। हालांकि, इसी दिन जारी व्हाइट हाउस के तथ्य-पत्र में सीधे तौर पर भारत का नाम नहीं लिया गया था, लेकिन रणनीति दस्तावेज़ में इसका साफ उल्लेख है।

दूसरे देशों पर भी अमेरिका की नज़र

भारत और वियतनाम के अलावा, अमेरिकी व्यापार कार्यालय ने जापान और यूरोपीय संघ की नीतियों पर भी आपत्ति जताई है। USTR के मुताबिक, जापान द्वारा लगाया जाने वाला 10 प्रतिशत तक का आयात शुल्क और कोटा अमेरिकी निर्यातकों को नुकसान पहुँचाता है। वहीं, यूरोपीय संघ की 'कैच योजना' के कारण अमेरिकी मछुआरों पर दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

भारत का पक्ष और व्यापारिक तनाव

भारत अमेरिका को झींगा निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में से एक है। हालांकि, हाल के वर्षों में भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी शुल्कों के अलावा एंटी-डंपिंग और प्रतिपूरक शुल्कों जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है।

भारत हमेशा विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे मंचों पर अपनी मत्स्य सब्सिडी नीति का बचाव करता आया है। भारत का तर्क है कि यह सहायता देश के लाखों छोटे और पारंपरिक मछुआरों की आजीविका के लिए बेहद ज़रूरी है। ऐसे में, अमेरिकी रणनीति में भारत की सब्सिडी का उल्लेख दोनों देशों के बीच समुद्री खाद्य व्यापार को लेकर एक और मतभेद का मुद्दा बन सकता है।

इनपुट: IANS

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