क्यों रखते हैं रमजान में रोज़े?

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क्यों रखते हैं रमजान में रोज़े?

मुस्लिम समुदाय द्वारा पाक माना गया रमजान का माह शुरू हो या है। इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से यह नौंवा रोज़ो का महीना माना जाता है। इस महीने में मुस्लिम लोग पूरे महीने (30 दिन ) रोज़ा रखते है। रोज़ो के नियम काफी कठिन होते है जो इंसान में सहनशीलता बढ़ाते है। रोज़ो में गलत ना करने और करने देने का प्रण लिया जाता है।

रमजान का इतिहास
रमजान की शुरुआत सऊदी अरब से हुई थी। रमजान के महीने को ‘माह-ए-सियाम’ कहा जाता है। यह माना जाता है कि इसी महीने में मुस्लिम समुदाय कि पाक किताब कुरान अवतरित हुई। कुरान जो ईश्वरी ग्रंथ है जिसे मुस्लिम के आखिरी पैंगंबर जिन्हें लोग इस्लाम के सबसे महान नबी और आख़िरी सन्देशवाहक मानते है! उन्होंने लोगों को ‘क़ुरआन का सन्देश’ दिया था। उनकी इस भेंट का कर्ज लोग रोज़े रख कर अदा करते है।

रमजान का समय
रमजान के रोज़ो को “इबादत” भी कहा जाता है।
रोज़े के समय को तीन भागो में बांटा गया है-

सहरी: सहरी का अपना एक महत्व होता है यह सुबह के वक़्त से पहले का भी वक़्त होता है, इसमें सूर्य उदय होने के दो घंटे पहले जगना होता है और कुछ खाने के बाद रोज़ा शुरू होता है। इसके बाद पूरा दिन कुछ भी खाया या पीया नहीं जाता।
इफ्तार: शाम को सूरज डूबने के बाद कुछ समय का अंतराल रखते हुए रोज़ा खोला जाता है जिसका एक वक़्त निश्चित होता है।
तरावीह: रात को एक निश्चित समय पर नमाज अदा की जाती है। लगभग रात नौ बजे मस्जिदों में कुरान पढ़ी जाती है। यह सिलसिला पूरे रमजान (30 दिन ) चलता है और फिर ईद का जश्न मनाया जाता है।

रमजान के रोज़ो का नियम
रमजान में रखे जाने वाले रोज़ो के नियम सख्त होते है जिन्हे पूरी शिद्द्त से निभाना होता है। जिनका उद्देश्य इंसान की अच्छी व सच्ची भावनाओं को उजागर करना होता है। इंसान अपनी अन्तर्शक्ति को महसूस कर पाता है। रमजान के नियम काफी मुश्किल होते है।
– अल्लाह का नाम लेना और रोजाना नमाज़ पढ़ना
– गलत आदतों और गलत चीज़ों से परहेज करना (किसी भी तरह का नशा ना करने की सख्ती यहाँ तक की गलत देखने और सुनने और बोलने पर भी रोक होती है)
– मार पिटाई से भी रहना होता है दूर
-महिलाओं के प्रति सदभावना है जरूरी
-नेकी का रास्ता और नेकी कार्यों को बढ़ावा
-अस्तग़फर करना (अपने किये गुनाहों की माफ़ी माँगना)
-जन्नत के लिए दुआ
-पूरा दिन ना कुछ खाना ना पीना
-गलत विचार लाना भी है गलत

क्यों मनाते है रमजान?
रमजान का उद्देश्य लोगो में विश्वास और प्रेम को बढ़ाना होता है। साथ ही धार्मिक रीतियों द्वारा लोगो को बुरी कुरीतियों से दूर रखना, गरीबो को दान देना होता है। ईद के दिन शत्रुता भी मित्रता में बदल लोग आपस में मिलते है, प्यार बाटते है।
इस्लाम धर्म के अनुसार मुसलमान का मतलब “मुस्ल-ए-ईमान” होता है। जिसका मतलब जो ईमान का पक्का होता है।

हमारे सारे मुस्लिम भाइयों और बहनो को रमजान की बधाईयाँ।

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