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अखिलेश यादव का अयोध्या दौरा: रामलला से दूरी पर साधु-संतों ने उठाए सवाल, सपा प्रमुख को बताया 'कपटी'

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर स्थानीय साधु-संतों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संतों ने इस बात पर नाराज़गी जताई कि अखिलेश यादव अयोध्या तो आ रहे हैं…

अखिलेश यादव का अयोध्या दौरा: रामलला से दूरी पर साधु-संतों ने उठाए सवाल, सपा प्रमुख को बताया 'कपटी'
(फोटो: IANS)

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर स्थानीय साधु-संतों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संतों ने इस बात पर नाराज़गी जताई कि अखिलेश यादव अयोध्या तो आ रहे हैं, लेकिन वे न तो रामलला के दर्शन करेंगे और न ही हनुमानगढ़ी में माथा टेकेंगे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, संतों ने इसे सपा प्रमुख की 'कपटी' सोच और तुष्टीकरण की राजनीति का परिणाम बताया है।

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दरअसल, अखिलेश यादव गुरुवार को अयोध्या में पार्टी के एक नेता द्वारा आयोजित भागवत कथा में शामिल होने पहुंचे थे। इसी कार्यक्रम को लेकर संतों ने उन पर निशाना साधा है। हनुमानगढ़ी के पुजारी महंत देवेशाचार्य महाराज ने कहा, "यह बहुत प्रसन्नता का विषय है कि पूर्व मुख्यमंत्री अयोध्या की पावन धरती पर आ रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य है कि अयोध्या आकर भी वे अयोध्या धाम नहीं आ रहे हैं।"

रामचरितमानस का दिया हवाला

महंत देवेशाचार्य ने रामचरितमानस का उल्लेख करते हुए कहा कि जिसके मन में छल-कपट होता है, वह भगवान के दरबार तक नहीं पहुंच पाता। उन्होंने दावा किया कि यह बात अखिलेश यादव के मामले में पूरी तरह सिद्ध होती दिख रही है। उन्होंने इस पर भी सवाल उठाया कि सपा प्रमुख भगवान रामलला, हनुमान जी महाराज और मां सरयू के दर्शन क्यों नहीं कर रहे हैं, और इसे "संसार का सबसे बड़ा दुर्भाग्य" करार दिया।

'तुष्टीकरण की राजनीति' का आरोप

वहीं, साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने अखिलेश यादव के इस फैसले के पीछे उनकी राजनीतिक सोच को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख एक विशेष संप्रदाय के तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं और उन्हें डर है कि रामलला के दर्शन करने से उनके समर्थक या कुछ धार्मिक नेता नाराज़ हो सकते हैं। महंत ने पूर्व की हिंसक घटनाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि जिन्होंने अयोध्या को रक्तरंजित किया और रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं, उनके लिए यही बेहतर है कि वे रामलला के दर्शन न करें।

इकबाल अंसारी की अलग राय

इस मामले में बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या भगवान राम की नगरी है और आस्था का केंद्र है। IANS के हवाले से उन्होंने कहा, "चूंकि वे (अखिलेश) भागवत कथा में शामिल हो रहे हैं, इसलिए उन्हें भगवान राम के दर्शन भी करने चाहिए और सरयू में पवित्र डुबकी भी लगानी चाहिए।" अंसारी ने ज़ोर देकर कहा कि अयोध्या सभी की है और अखिलेश यादव को रामलला के दर्शन ज़रूर करने चाहिए।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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