AIMIM यूपी में M-Y फैक्टर में लगा रही सेंध, मुस्लिम वार्डों में दी सीधी टक्कर, सपा की बढ़ी टेंशन

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AIMIM यूपी में M-Y फैक्टर में लगा रही सेंध, मुस्लिम वार्डों में दी सीधी टक्कर, सपा की बढ़ी टेंशन

AIMIM यूपी में M-Y फैक्टर में लगा रही सेंध, मुस्लिम वार्डों में दी सीधी टक्कर, सपा की बढ़ी टेंशन

ओवैसी को मुस्लिम वोटर अब विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। यही कारण है कि यूपी निकाय चुनाव में मुस्लिम बहुल इलाकों में सपा से ज्यादा ओवैसी की पार्टी को वोट मिले हैं।

 

सुमित शर्मा, कानपुरः उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है। पिछले कई दशकों में जो काम बीएसपी, बीजेपी और कांग्रेस नहीं कर पाई, वो काम असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने कर दिखाया। ओवैसी यूपी में सपा के एम-वाई (मुस्लिम-यादव) किले को भेदने में कामयाब हो रहे हैं। निकाय चुनाव में उन्होंने सपा के मुस्लिम वोटरों में जबरदस्त सेंध लगाई है। मुस्लिम वार्डों में एआईएमआईएम ने सपा को सीधी टक्कर दी है। सपा की जीत में सबसे बड़ी बाधक भी बनी है। जिसका नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा है।कांग्रेस, सपा और बीएसपी मुस्लिम वोटरों की राजनीति करती हैं। मुस्लिम वोटर भी इन्हीं तीनों पार्टियों को वोट करते हैं, लेकिन बीते कुछ वर्षों में देखा गया है कि मुस्लिम वोटर कांग्रेस, सपा और बीएसपी से दूरी बना रहा है। मुस्लिम वोटर एआईएमआईएम को एक बेहतर विकल्प के रूप में देख रहे हैं। इसके पीछे मुख्य यह भी मानी जा रही है कि असदुद्दीन ओवैसी मुस्लिम समुदायों के मुद्दो पर खुलकर बोलते हैं। उनके हितों की बात करते हैं। साथ ही उनकी बातों को मजबूती से रखते हैं। जिसकी वजह से यूपी का मुस्लिम वोटर सपा समेत अन्य राजनीतिक पार्टियों से दूरी बना रहे हैं।

मुस्लिम समाज के हितों की रक्षा करने सक्षम में नहीं है सपा

मुस्लिम समाज को लग रहा है कि समाजवादी पार्टी उनके हितों की रक्षा करने में सक्षम नहीं है। सपा मुखिया अखिलेश यादव विधायक इरफान से मिलने के लिए कानपुर जेल पहुंचे तो इरफान को 400 किलोमीटर दूर महाराजगंज जेल में भेज दिया गया। आरिफ के दोस्त सारस से मिलने के लिए अखिलेश पहुंचे तो आरिफ से सारस को जुदा कर दिया गया। इरफान, आजम खान और अब्दुल्ला आजम खान के मामलों में अखिलेश यादव कुछ नहीं कर पाए, जिससे मुस्लिम समाज में सपा के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। जिसकी वजह से मुस्लिम वोटर विकल्प के रूप में एआईएमआईएम की तरफ देख रहा है।

बीजेपी के गढ़ में उड़ी पतंग

यूपी के कानपुर की बात की जाए तो निकाय चुनाव में एआईएमआईएम ने शानदार प्रदर्शन किया है। एआईएमआईएम ने सबसे ज्यादा नुकसान सपा का किया है। जिसका सीधा फायदा बीजेपी ने उठाया है। घाटमपुर नगर पालिका में अध्यक्ष के चुनाव में एआईएमआईएम प्रत्याशी गजाला तबस्सुम ने सपा की चंद्रक्रांति सचान को 84 वोटों से हरा दिया। घाटमपुर बीजेपी का किला माना जाता है, कुर्मी वोटरों का गढ़ कहा जाता है। घाटपुर विधानसभा सीट से बीजेपी की सहयोगी पार्टी अपना दल (एस) से सरोज कुरील विधायक हैं। इसके साथ अकबरपुर लोकसभा सीट से देवेंद्र सिंह सांसद हैं। इसके बाद भी निकाय चुनाव में एआईएमआईएम की गजाला तबस्सुम की जीत ने सभी राजनीतिक पार्टियों के होश उड़ा दिए हैं।

AIMIM के मेयर प्रत्याशी को मिले इतने वोट

आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) चीफ असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से 2017 के निकाय चुनाव में भी एक पार्षद ने जीत दर्ज की थी। वहीं, इस निकाय चुनाव में भी एक पार्षद ने जीत दर्ज की है। कर्नलगंज के वार्ड-110 से मो. नौशाद ने जीत दर्ज की है। वहीं, एआईएमआईएम की महापौर प्रत्याशी शहाना परवीन को 16,372 वोट मिले हैं। शहाना परवीन को ये वोट मुस्लिम इलाकों से मिला है। जिसका नुकसान कांग्रेस और सपा को उठाना पड़ा है। जिसका सीधे तौर पर बीजेपी ने फायदा उठाया है। इसके साथ ही एआईएमआईएम का वोट प्रतिशत भी बढ़ा है। मुस्लिम क्षेत्रों में ओवैसी की पार्टी तेजी से विस्तार कर रही है।

AIMIM ने बिगाड़ा सपा का समीकरण

निकाय चुनाव में एआईएमआईएम ने कई मुस्लिम वार्डों में सपा को सीधी टक्कर दी, जिसमें सपा प्रत्याशियों ने जीत तो दर्ज की, लेकिन बहुत मामूली बढ़त के साथ। इसके साथ ही कई वार्डों में एआईएमआईएम ने सपा का समीकरण बिगाड़ दिया। वोट कटवा का काम करने की वजह से वार्ड-प्रत्याशियों को हार का भी सामना करना पड़ा। एआईएमआईएम के वार्ड प्रत्याशी कई सीटों पर दूसरे नंबर पर रहे।

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