अब इस समुदाय के आवाज उठाने से बीजेपी की बढ़ी मुश्किल, जल्दी हल नहीं निकाला तो….

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नई दिल्ली: भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल की अगुवाई में बीते दिन यानी मंगलवार को राज्य कार्यालय में हुई बैठक में सवर्ण आंदोलन का मामला काफी सुर्ख़ियों में दिखाई दिया. सवर्ण आंदोलन के गुस्से को शांत करने की रणनीति बनाने के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ब्राह्रण, क्षत्रिय मंत्रियों और पदाधिकारियों के साथ अलग से मीटिंग भी की गई.

प्रदर्शन कर रहें लोगों से विचार-विमर्श करें और समन्वय बनाने का कार्य करें- रामलाल

इस दौरान उन्होंने टारगेट दिया है कि प्रदेश के सवर्ण नेता अपने-अपने क्षेत्र में जाकर एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहें लोगों से विचार-विमर्श करें और समन्वय बनाने का कार्य करें. उनके यह कहना का मकसद यह है कि अगर समय रहते यह तालमेल नहीं बनाया गया तो चुनाव के समय बड़ी मुश्किल पैदा हो सकती है. इस बैठक में रामलाल के साथ राष्ट्रीय महामंत्री अनिल जैन, नारायण पंचारिया और दिल्ली से आए अन्य पदाधिकारियों ने दिन भर में छह मीटिंगों में वार्ता की.

रामलाल ने पदाधिकारियों की मुख्य मीटिंग में कहा कि सभी जानते के सवर्ण आंदोलन के पर्दे के पीछे कौन है. इसमें आप सभी समन्वय बनाने में सक्रिय नहीं हो रहें है. वहीं 25 सितंबर को भोपाल ने होने वाले कार्यकर्ता महाकुंभ से पहले सवर्ण आंदोलन को रोकना काफी जरूरी है.

कार्यकर्ता महाकुंभ की तैयारियों का जायजा लेने के लिए यहां से जंबूरी मैदान पहुंचे रामलाल और अनिल 

इस बैठक के माध्यम से महापौरों और जिला सहकारी बैंकों के अध्यक्षों को कार्यकर्ता महाकुंभ में अधिक से अधिक भीड़ लाने की बात पर खास रूप से कार्य करने के लिए कहा गया है. संगठन महामंत्री रामलाल ने सहकारी बैंक के अध्यक्षों को कहा कि संगठन ने आपको कुर्सी पर बैठाया है. करीब एक बस भरकर कार्यकर्त्ता तो लेकर आना. रामलाल ने सभी मोर्चों को 27 सितंबर तक और प्रकोष्ठों को सात अक्टूबर तक चुनावी माहौल को देखते हुए बैठक के आदेश दिए है. ये ही नहीं रामलाल और अनिल जैन कार्यकर्ता महाकुंभ की तैयारियों का जायजा लेने के लिए यहां से जंबूरी मैदान तक गए.

कौन-कौन रहा शामिल

बता दें कि मंत्रणा में प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के अतिरिक्त ब्राह्मण नेताओं में मंत्री नरोत्तम मिश्रा, अनूप मिश्रा, अर्चना चिटनीस, पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव और वीडी शर्मा शामिल थे. वहीं, क्षत्रिय नेताओं में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, अरविंद भदौरिया, विजेंद्र सिंह सिसौदिया, विजेंद्र सिंह सिसौदिया और अजय प्रताप ङ्क्षसह मौजूद थे.