झारखंड: रिहाई के बाद भी महिला को डिटेंशन सेंटर में रखा, दुष्कर्म के आरोप पर हाईकोर्ट सख्त, गृह सचिव तलब
झारखंड में एक महिला को आपराधिक मामले में बरी होने के बाद भी कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखने और उसके साथ दुष्कर्म के आरोपों पर झारखंड हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। समाचार एजेंसी IANS के…
झारखंड में एक महिला को आपराधिक मामले में बरी होने के बाद भी कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखने और उसके साथ दुष्कर्म के आरोपों पर झारखंड हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत के निर्देश पर सोमवार को राज्य की गृह सचिव वंदना दादेल को व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ा।
यह पूरा मामला सामाजिक कार्यकर्ता अपूर्व विवेक द्वारा दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से संबंधित है, जिसमें महिला को हजारीबाग के डिटेंशन सेंटर में रखे जाने को चुनौती दी गई है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अखिल कुमार की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से पूछा कि जब महिला अपनी सजा पूरी कर चुकी थी, तो उसे किस कानूनी आधार पर हिरासत में रखा गया।
अदालत के समक्ष सीलबंद रिपोर्ट पेश
सुनवाई के दौरान झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) ने हजारीबाग की जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की जांच रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपी। इस रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने अपने बयान में कांस्टेबल रंजीत महतो समेत तीन पुलिसकर्मियों पर उसके साथ दुष्कर्म करने का गंभीर आरोप लगाया है। अदालत ने पिछली सुनवाई में झालसा को महिला का बयान दर्ज करने का निर्देश दिया था।
सजा पूरी, फिर भी हिरासत क्यों?
अदालत को बताया गया कि महिला फॉरेनर्स एक्ट के तहत तीन साल की सजा पूरी कर चुकी थी। इस पर खंडपीठ ने जोर देकर पूछा कि सजा पूरी होने के बाद भी उसकी हिरासत जारी रखने की कानूनी वजह क्या थी। अदालत ने टिप्पणी की कि संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जिसे कानून के बिना छीना नहीं जा सकता।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल हुए हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक ने आरोपी कांस्टेबल के खिलाफ जांच करने और महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को ही दोपहर 2.15 बजे दोबारा सुनवाई तय की, ताकि सरकार के जवाब और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला किया जा सके।
इनपुट: IANS



