निर्भया कांड में शामिल एक मुजरिम ने राष्ट्रपति कोविंद को भेजी दया याचिका

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निर्भया कांड में शामिल एक मुजरिम ने राष्ट्रपति कोविंद को भेजी दया याचिका

निर्भया कांड एक दर्दनाक हादसा, दिल्ली के चेहरे पर एक बदनुमा दाग की तरह बन गया. पांच बालिक और एक नाबालिग दरिंदों ने मिलकर 23 साल की लड़की के साथ हैवानियत का खौफनाक खेल- खेला था. जिसे जानकर हर देशवासी का कलेजा कांप गया था. सारे देश के लोग उसके बचने के लिए दुआऐ मांग रहें थे. वह युवती जो पैरामेडिकल की छात्रा थी पैरामेडिकल का मतबल है. एक विज्ञान जो पूर्व-अस्पताल के आपातकालीन सेवाओं से संबंधित है. यह युवती अपने पुरूष मित्र के साथ बस में सवार होकर अपने घर जा रही थी. जब उसके साथ यह हादसा हुआ था. वहीं इस हादसे सें संबंधित एक अपराधी ने राष्ट्रपति कोविंद से दया याचिका मांगी है

दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप के बारें में कौन नहीं जानता सभी इससे रूबरू है और जब भी इस पर चर्चा की जाती है, तो लोगों की रूह तक कांप उठती है. सभी लोग यहीं दुआ करते है कि किसी भी के साथ भी ऐसा हादसा न हो. दिसंबर 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप मामले में अब नया मोड़ आ गया है.

फांसी की सजा का सामना कर रहें चार दोषियों में से एक ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से दया याचिका की मांग की है. दया याचिका दाखिल करने वाले अपराधी का नाम विनय कुमार शर्मा है. गिरफ्तार होने के बाद से ही अपराधी विनय कुमार शर्मा दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है. जानकारी के मुताबिक पता चला हैं कि इसकी पुष्टि तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने की.

जेल महानिदेशक ने कहा कि चारों मुजरिमों को उनका कानूनी हक बताने के लिए संबंधित जेलों के जेल अधीक्षकों द्वारा 29 अक्टूबर को नोटिस जारी किए गए थे. मंडोली में स्थित जेल नंबर-14 में बंद पवन कुमार गुप्ता और तिहाड़ की अलग-अलग जेलों में बंद विनय कुमार शर्मा, अक्षय कुमार सिंह व मुकेश ने नोटिस प्राप्त भी किए थे. नोटिस प्राप्त होने के कई दिनों बाद तक चारों मुजरिम चुप्पी साधे रहे. शुक्रवार को पवन कुमार गुप्ता, विनय कुमार शर्मा और अक्षय कुमार सिंह से उनके वकीलों ने जेल में लंबी मुलाकात भी की थी.

दो मुवक्किल सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन और एक मुजरिम सोमवार को रिव्यू पिटीशन दाखिल करेगा. लेकिन तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने बुधवार को जब पुष्टि की, कि एक मुजरिम विनय कुमार शर्मा ने जेल प्रशासन को राष्ट्रपति के नाम संबोधित दया याचिका दी है, तो पूरा मामला ही एकदम पलट गया.

दया याचिका दाखिल करने के बाद विनय कुमार शर्मा के वकील अजय प्रकाश सिंह का कहना है कि पता नहीं यह कैसे हो गया? जब मैं जेल में गया तब तो मुजरिम विनय कुमार शर्मा ने राष्ट्रपति के यहां दया याचिका भेजने की बात से साफ इंकार किया था. हो सकता है कि तिहाड़ जेल प्रशासन ने सरकार के दबाव में याचिका लिखवा ली हो.

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वहीं तिहाड़ जेल प्रशासन का कहना है कि हमें किसी मुजरिम से कोई चीज जबरदस्ती लिखवाने का कोई अधिकार नहीं है. मुजरिमों को नोटिस देकर आगाह करना हमारा काम था. बाकी नोटिस पर अमल करके आगे की सोचना या फिर राष्ट्रपति के यहां दया याचिका दाखिल करने की जिम्मेदारी मुजरिमों की थी. अगर जेल प्रशासन ने विनय कुमार शर्मा से जबरदस्ती राष्ट्रपति के नाम दया याचिका लिखवा ली, तो फिर बाकी तीन मुजरिमों से जबरदस्ती दया याचिका क्यों नहीं लिखाई?