मुरैना में रात 2 बजे अचानक सड़क पर उतरे कलेक्टर-SP: अवैध रेत खनन रोकने चेक पोस्टों का निरीक्षण, ईंटों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली रोकी – Morena News h3>
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चंबल में अवैध रेत उत्खनन पर नकेल कसने के लिए प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। बुधवार रात करीब 2 बजे कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ और एसपी धर्मराज मीणा दल-बल के साथ नेशनल हाईवे 44 और राजघाट पर औचक निरीक्षण करने पहुंचे। इस कार्रवाई के दौरान टीम को अवैध रेत परिवहन तो नहीं मिला, लेकिन माइनिंग विभाग ने अवैध रूप से ईंट ले जा रही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को पकड़कर कार्रवाई की है। कलेक्टर और एसपी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने के लिए लगातार तीसरी बार रात के अंधेरे में जमीनी हकीकत परखने निकले थे। अधिकारियों ने सबसे पहले नेशनल हाईवे 44 पर बने वन विभाग के चेक पोस्ट का जायजा लिया। इसके बाद टीम सिकरौदा नहर के एसएएफ (SAF) टेंट चेकिंग पॉइंट, राजघाट एसएएफ गार्ड चेकिंग पॉइंट, कुल्हड़ा, गढ़ौरा का पुरा और आरटीओ चेकिंग पॉइंट पर पहुंची। इस पूरी कार्रवाई के दौरान माइनिंग अधिकारी सुखदेव निर्मल भी उनके साथ मौजूद रहे। देखिए 5 तस्वीरें… सुरक्षाकर्मियों को निर्देश- दबाव में न आएं, लापरवाही पर मिलेगी सजा
कलेक्टर और एसपी ने विभिन्न नाकों पर ड्यूटी कर रहे वन विभाग और एसएएफ के जवानों से सीधे चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि रेत के अवैध परिवहन पर सख्त कार्रवाई की जाए और बिना किसी दबाव में आए अपना काम मुस्तैदी से करें। दोनों अधिकारियों ने चेतावनी दी कि ड्यूटी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि इलाके में कहीं भी रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली परिवहन करते पाए गए, तो इसके लिए सीधे तौर पर तैनात कर्मियों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा। चंबल के सभी घाट पूर्णतः बंद- कलेक्टर
कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने बताया कि सभी चेकिंग पॉइंट्स पर सुरक्षाकर्मी शिफ्ट के अनुसार अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान नेशनल हाईवे 44, राजघाट और गढ़ौरा सहित किसी भी इलाके में रेत माफिया की कोई हलचल नहीं देखी गई। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि चंबल नदी के किनारे के सभी घाट अब पूरी तरह बंद करा दिए गए हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात की आशंका से इनकार नहीं किया कि छिटपुट स्तर पर कोई इक्का-दुक्का ट्रॉली रेत अन्य स्थानों से उठाकर ला सकता है। प्रशासन की टीमें अब लगातार ग्रामीणों के बीच जाकर उन्हें रेत उत्खनन न करने की समझाइश भी दे रही हैं।