PACL घोटाले में PMLA अदालत का फैसला: 282 प्रॉपर्टीज जस्टिस लोढ़ा कमेटी को सौंपने का आदेश, ऑस्ट्रेलिया की संपत्तियां भी शामिल – Mohali News h3>
PACL घोटाले में PMLA अदालत ने प्रॉपर्टी अटैच के आर्डर दिए। फाइल फोटो
PACL घोटाले से जुड़े मामले में ईडी को बड़ी सफलता मिली है। विशेष PMLA अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 282 अचल संपत्तियों को निवेशकों को धन वापसी की प्रक्रिया के लिए जस्टिस लोढ़ा कमेटी को सौंपने का आदेश दिया है। मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 9,420.57 करो
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3 पॉइंट्स में समझिए, कोर्ट के इस आदेश का क्या मतलब है?
जस्टिस लोढ़ा कमेटी बेचेगी प्रॉपर्टी: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी जस्टिस आर.एम. लोढ़ा कमेटी इन 282 संपत्तियों को लिक्विडेट (बेचकर) करेगी। इससे मिलने वाले पैसे से निवेशकों का रिफंड किया जाएगा।
अब तक 28,626 करोड़ की संपत्ति अटैच: चालू वित्त वर्ष में ED ने 1,595.85 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की है, जिसके बाद इस पूरे केस में कुल अटैचमेंट 28,626 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसमें भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया में मौजूद संपत्तियां भी शामिल हैं।
अवैध तरीके से बनाई गई थी संपत्ति: ED की जांच में सामने आया कि निवेशकों से लूटे गए पैसे (Proceeds of Crime) को अलग-अलग फर्जी कंपनियों और रिश्तेदारों के नाम पर ट्रांसफर कर भारत और विदेशों में प्रॉपर्टी खरीदी गई थी।
बरिंदर कौर और प्रेम कौर के खिलाफ वारंट जारी
ED ने इस वित्तीय वर्ष के दौरान लगभग 1,595.85 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं। इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुल कुर्क की गई संपत्तियों का मूल्य बढ़कर 28,626 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इनमें भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया में स्थित संपत्तियां भी शामिल हैं। इस मामले में आरोपी निर्मल सिंह भंगू के परिवार के सदस्यों सुखविंदर कौर और गुरप्रताप सिंह के खिलाफ भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। वहीं हरसातिंदर पाल सिंह हेयर को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बरिंदर कौर और प्रेम कौर के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किए गए हैं। करीब 68,000 करोड़ रुपये की कथित निवेशक धोखाधड़ी से जुड़े इस मामले में अदालत का यह फैसला निवेशकों की राशि की रिकवरी की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ऐसे चला यह सारा मामला
इस मामले की शुरुआत (CBI) द्वारा M/s PACL लिमिटेड और उसके प्रमोटरों के खिलाफ लाखों निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के आरोप में दर्ज की गई FIR से हुई थी। जांच में सामने आया कि स्वर्गीय निर्मल सिंह भंगू और उनके सहयोगियों ने PGF लिमिटेड और PACL लिमिटेड के माध्यम से पूरे देश में बड़े पैमाने पर अवैध सामूहिक निवेश योजना (Collective Investment Scheme) चलाई। इसके जरिए निवेशकों से 68,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई।
आरोप है कि निवेशकों को किस्तों और नकद भुगतान वाली योजनाओं का लालच देकर समझौतों और पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे भ्रामक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। कई मामलों में जमीन का स्वामित्व न होने के बावजूद निवेशकों को अलॉटमेंट लेटर जारी कर दिए गए।
साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘सुब्रत भट्टाचार्य बनाम सेबी’ मामले में आदेश देते हुए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया था, ताकि संपत्तियों की बिक्री कर निवेशकों का पैसा लौटाया जा सके।
CBI की जांच के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 26 जुलाई 2016 को ECIR दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। ED की जांच में खुलासा हुआ कि अपराध से अर्जित धन को फर्जी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए व्यवस्थित रूप से इधर-उधर किया गया और उससे भारत तथा विदेश, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में संपत्तियां खरीदी गईं।
धोखाधड़ी का दायरा इतना बड़ा है कि आज भी करीब 48,000 करोड़ रुपये निवेशकों को वापस नहीं मिल पाए हैं। ऐसे में अदालत और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को निवेशकों की राशि की रिकवरी की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।



