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सरकार एक पेड़ मां के नाम लगवा रही: मजदूरों के गड्‌ढे खोदने के पैसे अटके; सचिवालय के बाहर बच्चों को लेकर बैठे एमपी के मजदूर – Alwar News

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सरकार एक पेड़ मां के नाम लगवा रही:  मजदूरों के गड्‌ढे खोदने के पैसे अटके; सचिवालय के बाहर बच्चों को लेकर बैठे एमपी के मजदूर – Alwar News

सरकार एक पेड़ मां के नाम लगवा रही: मजदूरों के गड्‌ढे खोदने के पैसे अटके; सचिवालय के बाहर बच्चों को लेकर बैठे एमपी के मजदूर – Alwar News


सरकार एक पेड़ मां के नाम लगवा रही लेकिन मजदूर अपनी मजदूरी के लिए भटकने को मजबूर हैं। मामला अलवर जिले के राजगढ़ क्षेत्र के परबेणी और दानपुर गांवों का है, जहां सरिस्का के रेंजर राहुल फौजदार और फॉरेस्टर राकेश कुमार यादव पर मजदूरों को भुगतान नहीं करने के आरोप लगे हैं। मध्यप्रदेश से आए करीब 20 मजदूर पिछले दो दिनों से अलवर मिनी सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। मजदूर सड़क किनारे खाना बनाकर रह रहे हैं और उनके साथ छोटे-छोटे बच्चे भी मौजूद हैं। मजदूरों का आरोप है कि करीब एक महीने पहले उन्हें पौधारोपण के लिए गड्ढे खोदने का काम देने के लिए बुलाया गया था। उस समय 15 रुपये प्रति गड्ढा के हिसाब से भुगतान तय हुआ था। मजदूर करण ने बताया कि सभी श्रमिकों ने मिलकर एक महीने में 16,120 गड्ढे खोदे। इसके बदले कुल 2 लाख 41 हजार 800 रुपये का भुगतान बनता है। काम के दौरान उन्हें करीब 26 हजार रुपये खर्च के लिए दिए गए, जबकि अभी भी लगभग 2 लाख 15 हजार रुपये बकाया हैं। आरोप है कि काम पूरा होने के बाद अधिकारियों ने भुगतान देने से इनकार कर दिया और घर लौट जाने को कहा। महिला मजदूर लाड़ली बाई ने कहा कि वे रोज कमाकर अपना परिवार चलाते हैं। मजदूरी नहीं मिलने से उनके सामने खाने-पीने तक का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने साफ कह दिया कि अब कोई भुगतान नहीं मिलेगा। वहीं, इस मामले में रेंजर राहुल फौजदार ने कहा कि मजदूर उनके माध्यम से नहीं आए थे। उनका दावा है कि भुगतान का बिल डीएफओ राजेंद्र हुड्डा को भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि यह कार्य वीएपीएमसी समिति के माध्यम से कराया जाता है। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि मजदूरों द्वारा बताए गए कार्य के अनुसार गड्ढे खोदे गए हैं या नहीं, तो उन्होंने कहा कि इसकी जांच करवाई जाएगी। रेंजर के इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि काम की मात्रा की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, तो फिर भुगतान का बिल किस आधार पर तैयार कर आगे भेजा गया। आमतौर पर बिल तैयार होने से पहले कार्य का सत्यापन किया जाता है और यह देखा जाता है कि जितना भुगतान प्रस्तावित है, उतना कार्य वास्तव में हुआ भी है या नहीं। ऐसे में मजदूरों की मजदूरी अटकने और जिम्मेदार अधिकारियों के बयानों को लेकर मामला विवादों में आ गया है।

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