1000 फीट ऊंचे पठार पर बनाया मगरों वाला बाग: केसर-दशहरी आम उगाए, नौकरी छोड़ किसानी शुरू की – Udaipur News

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1000 फीट ऊंचे पठार पर बनाया मगरों वाला बाग:  केसर-दशहरी आम उगाए, नौकरी छोड़ किसानी शुरू की – Udaipur News

1000 फीट ऊंचे पठार पर बनाया मगरों वाला बाग: केसर-दशहरी आम उगाए, नौकरी छोड़ किसानी शुरू की – Udaipur News


दृढ़ इच्छाशक्ति और कुछ नया करने का जज्बा हो तो पथरीली और बंजर जमीन से भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है। इसे सच कर दिखाया है उदयपुर जिले के खेकरा घाटी गांव के किसान जीतू प्रजापत ने।
जीतू पहले गुजरात में नौकरी करते थे। कोरोना लॉकडाउन के दौरान गांव आकर पारिवारिक खेती–बाड़ी में हाथ बंटाने लगे। मगर घर का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा था। तब उन्होंने अपने गांव में पहाड़ी क्षेत्र में खाली पड़ी बंजर जमीन पर नवाचार किया। उन्होंने पठारी व पथरीली जमीन को काटकर सीढ़ीनुमा आकार देकर इसे खेती योग्य बना दिया। बारिश का पानी एकत्र करने के लिए 25000 लीटर का एक टैंक बनाया, जिसे कुएं से पाइपलाइन के जरिए जोड़ा दिया। ताकि हर सीजन में पानी पहुंचाया जा सके। जमीन तैयार करने के बाद पारंपरिक फसलों के बजाय फलदार पौधे लगाने का निर्णय लिया। नाम भी दिया- मगरों वाला बाग चार बीघा जमीन में आम की प्रसिद्ध केसर, राजापुरी और दशहरी किस्मों के 200 पौधे लगाए। यहां आंवले के 140, नींबू के 35, चीकू के 20, कटहल के 15 और केले के 16 पौधे भी फल दे रहे हैं। उन्होंने इसे मगरों वाला बाग” का नाम दिया है। लगभग 500 फीट चौड़े और 350 फीट लंबे इस बाग में 21 प्रकार के फल–फूल के पौधे हैं। प्रमुख रूप से आम हैं लेकिन मौसमी के 12, पपीता के 40, पीपल देवी के 120, तुलसी 10, जामुन के 20, अनार, सीताफल और बिजौरा नींबू के 13 पेड़ भी लहलहा रहे हैं। जैविक खाद का इस्तेमाल बागवानी के अलावा दूसरे खेत में गेहूं, सरसों व मक्का आदि की खेती व पशुपालन करते हैं। खेती में किसी कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं कर रहे। खुद से तैयार किए जैविक खाद व गोबर का इस्तेमाल करते हैं। इससे उपज की लागत कम रहती है। सीढ़ीनुमा बागवानी मॉडल से उन्हें अतिरिक्त आमदनी होने लगी है। ताजा फलों को स्थानीय गोगुन्दा मार्केट के साथ-साथ उदयपुर शहर की बड़ी मंडियों में भी बेच रहे हैं। वे खर्चे निकालने के बाद शुरुआत में ही लाखों रुपए की बचत कर रहे हैं। प्रजापत बताते हैं कि आसपास के गांवों में इस तरह का कोई बाग नहीं है। मैं चाहता हूं कि दूसरे किसान भी इस तरह का नवाचार कर अपनी आमदनी को बढ़ाएं। वे खुद पौधों की कलम कर देते हैं। उनके पास कृषि और उद्यान विभाग के अधिकारी भी बाग देखने पहुंच रहे हैं। बंजर पहाड़ी पर लहलहाती हरियाली को देखकर आसपास के किसान भी प्रभावित हुए हैं। वे किसानों को अपनी खाली पड़ी पहाड़ी जमीनों को सीढ़ीनुमा आकार देने में मदद करने को तैयार हैं।

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