कागज पर दो बार बूढ़ा मानकर विभाग ने किया रिटायर: हाईकोर्ट ने मानी उम्र 59 वर्ष, अब साल 2029 तक नौकरी करेगा ‘चौकीदार’ – Gwalior News h3>
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने वन विभाग के एक बेहद चौंकाने वाले और तानाशाही फैसले पर रोक लगाते हुए शुक्रवार को एक दैनिक वेतन भोगी चौकीदार के हक में बड़ा फैसला सुनाया है।
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जिला मेडिकल बोर्ड की वैज्ञानिक रिपोर्ट को कूड़ेदान में फेंककर कर्मचारी को अधिकारियों ने मनमाने ढंग से जबरन रिटायर करने के विभाग के दो अलग-अलग आदेश दिए थे। मतलब कागजों में दो बार रिटायर्ड किया है। इन आदेशों को हाईकोर्ट ने पूरी तरह निरस्त कर दिया है।
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने वन विभाग को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता कर्मचारी को अप्रैल 2029 में उसकी कानूनी सेवाकाल की आयु (62 वर्ष) पूरी होने तक सम्मान सहित नौकरी पर बनाए रखा जाए। कोर्ट ने साल 2017 में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट जिसमें उस समय उसकी उम्र 50 वर्ष मानकर ही फैसला लिया है।
ग्वालियर हाईकोर्ट में मौजूद एडवोकेट।
ऐसे समझें पूरा मामला
- साहब सिंह ठाकुर को 12 अगस्त 1986 को दतिया वन परिक्षेत्र में दैनिक वेतन भोगी चौकीदार के पद पर नियुक्त किया था।
- साहब सिंह ने करीब 31 साल नौकरी में लगा दिए। 25 अप्रैल 2017 को विभाग ने उनकी सेवाओं को नियमित (स्थायी) कर दिया।
- साहब सिंह की भर्ती के समय वन विभाग के पास उनकी आयु का कोई आधिकारिक या पुख्ता रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
- तत्कालीन संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) ने नियमानुसार उनका ‘एज डिटरमिनेशन टेस्ट’ (आयु परीक्षण) कराने के लिए उन्हें जिला मेडिकल बोर्ड भेजा।
- 7 अप्रैल 2017 को डॉक्टरों के विशेषज्ञ पैनल (मेडिकल बोर्ड) ने पूरी वैज्ञानिक जांच के बाद साहब सिंह की वास्तविक उम्र 50 वर्ष निर्धारित की थी।
- मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक साहब सिंह ठाकुर को साल 2029 में रिटायर होना था।
- विभाग ने साहब सिंह की उम्र सीधे 60 वर्ष मान ली और 2017 में ही उनकी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) का आदेश थमा दिया।
- पीड़ित कर्मचारी जब हाईकोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने इस आदेश पर तुरंत ‘स्टे’ (स्थगन) दे दिया।
साल 2018 में दूसरी बार रिटायरमेंट कर दिया
- हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर से बौखलाए विभाग ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए 17 अप्रैल 2018 को एक और नया आदेश जारी कर दिया।
- अफसरों ने गलती छुपाने के लिए साहब सिंह की उम्र 62 वर्ष घोषित कर उन्हें फिर से नौकरी से बाहर धकेलने का प्रयास किया।
- दस्तावेजों पर एक ही कर्मचारी को दो बार जबरन बूढ़ा बना दिया गया।
ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर।
हाईकोर्ट ने कहा-“विशेषज्ञों की रिपोर्ट सर्वोपरि”
हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की सिंगल बेंच ने इस मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए वन विभाग के रवैये पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि “जब वन विभाग ने खुद अपनी मर्जी से याचिकाकर्ता को आयु निर्धारण के लिए अधिकृत जिला मेडिकल बोर्ड के समक्ष भेजा था, तो डॉक्टरों के विशेषज्ञ बोर्ड द्वारा प्रमाणित की गई 50 वर्ष (साल 2017 में) की आयु को प्रशासनिक अधिकारी अपनी टेबल पर बैठकर मनमाने ढंग से बदल नहीं सकते।
विभाग कोर्ट के समक्ष ऐसा कोई भी कानूनी दस्तावेज, जन्म प्रमाण पत्र या विपरीत मेडिकल ओपिनियन पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा है, जिससे जिला मेडिकल बोर्ड की प्रामाणिकता पर रत्ती भर भी संदेह किया जा सके।”
अब तीसरी बार साल 2029 में रिटायर होगा “चौकीदार’
हाईकोर्ट ने साहब सिंह ठाकुर की याचिका को पूरी तरह स्वीकार करते हुए वन विभाग के काले आदेशों को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि साहब सिंह अप्रैल 2029 तक सम्मानपूर्वक अपनी ड्यूटी करेंगे।
इसके साथ ही, विभाग की इस मनमानी के कारण पूर्व में उन्हें जो भी आर्थिक या मानसिक नुकसान हुआ है, उन्हें नियमित वेतनमान सहित सभी तरह के बैक-वेजेस (सेवा लाभ और एरियर) का भुगतान तत्काल किया जाए।
