एचपीवी टीकाकरण में डीडवाना-कुचामन बना नंबर-1: एक दिन में 500 से ज्यादा बच्चियों को लगी वैक्सीन, बनाया रिकॉर्ड – Didwana-Kuchaman News h3>
डीडवाना-कुचामन जिले ने एचपीवी टीकाकरण अभियान में प्रदेशभर में पहला स्थान हासिल किया है। जिले में एक ही दिन में 500 से अधिक बच्चियों को एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) वैक्सीन लगाई गई। यह अभियान किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित करने के उद्देश्य से चलाया गया। प्रदेशभर में कुल 3770 बच्चियों का टीकाकरण हुआ, जिसमें डीडवाना-कुचामन सबसे आगे रहा। स्वास्थ्यकर्मियों की मेहनत लाई रंग जिला कलेक्टर अवधेश मीणा के निर्देशन में चलाए गए इस विशेष अभियान में आशा सहयोगिनी, एएनएम और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। भीषण गर्मी के बावजूद स्वास्थ्य टीमें गांव-गांव और घर-घर पहुंचीं तथा अभिभावकों से संवाद कर उन्हें एचपीवी वैक्सीन के महत्व के बारे में जागरूक किया। घर-घर जाकर दूर की भ्रांतियां स्वास्थ्य टीमों ने अभिभावकों को बताया कि एचपीवी वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से बचाव का प्रभावी माध्यम है। लगातार काउंसलिंग और जागरूकता प्रयासों का असर यह रहा कि बड़ी संख्या में अभिभावक अपनी बच्चियों का टीकाकरण कराने के लिए आगे आए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरेंद्र चौधरी ने बताया कि अभियान के दौरान लोगों की भ्रांतियां और आशंकाएं दूर करने पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने कहा कि समय पर लगाया गया एचपीवी टीका भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करता है। एक दिन में 500 से अधिक बच्चियों का टीकाकरण स्वास्थ्य विभाग की बड़ी उपलब्धि है।
किशोरियों को मिल रहा सुरक्षा कवच जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. इरफान अली खत्री ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाली गंभीर बीमारियों में शामिल है और एचपीवी वैक्सीन इससे बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है। राज्य सरकार द्वारा 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की बच्चियों को यह टीका लगाया जा रहा है, ताकि उन्हें समय रहते सुरक्षा कवच मिल सके। प्रदेश में सबसे आगे डीडवाना-कुचामन प्रदेशभर में कुल 3770 बच्चियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई गई, जिसमें डीडवाना-कुचामन जिला 500 से अधिक टीकों के साथ पहले स्थान पर रहा। इसके बाद गंगानगर और झुंझुनूं जिले रहे। भीषण गर्मी में भी दिखा उत्साह भीषण गर्मी के बावजूद स्वास्थ्यकर्मियों और अभिभावकों का उत्साह इस अभियान की सफलता का सबसे बड़ा कारण बना। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह अभियान और व्यापक रूप लेगा तथा अधिक से अधिक बच्चियों को इस सुरक्षा कवच से जोड़ा जा सकेगा।
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