काशीविश्वनाथ मंदिर में ऐप सिस्टम का विरोध: कांग्रेस बोली- धाम को व्यापारिक केंद्र बनाने की कोशिश, CEO-SDM को हटाने की मांग – Varanasi News h3>
काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजिट के बाद लागू किए गए ऐप-आधारित नई प्रणाली का लागू होते ही काशीवासियों ने विरोध शुरू कर दिया है। आम जनता के साथ राजनीतिक दल भी इस व्यवस्था के विरोध में उतर आए हैं। इसके लिए सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन की रणनीति भी तैयार होने लगी है। कांग्रेस ने मंदिर सीईओ विश्वभूषण और एसडीएम शंभूशरण पर मंदिर को प्रयोगशाला बनाने का आरोप लगाया है, वहीं सपा ने धर्म और अस्था से खिलवाड़ करने और श्रद्धालुओं को बंधन में बांधने का आरोप लगाया है। अफसरों पर मनमानी करते हुए भक्तों की भावनाएं आहत करने की बात भी कही है। शुक्रवार को श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में लागू की जा रही ऐप आधारित व्यवस्था को लेकर कांग्रेस पार्टी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने इसे आस्था पर प्रहार बताते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ के दरबार को व्यापार का केंद्र बनाने की कोशिश की जा रही है, जिसे काशी की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। बताया कि विश्व की प्राचीनतम जीवंत नगरी काशी की आस्था को प्रशासनिक आदेशों और डिजिटल बाधाओं में कैद करने की कोशिश की जा रही है। मंदिर मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं एसडीएम ने मंदिर को प्रयोगशाला बना दिया है और सनातन सभ्यता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आमजनता को काशीपुराधिपति से दूर करने की कोशिश है। यह फैसला बताता है कि प्रशासन को न काशी की परंपरा की समझ है और न ही भक्तों की भावनाओं का सम्मान।लगातार मंदिर परिसर और धाम क्षेत्र में बाजारीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। हर व्यवस्था को कमाई, नियंत्रण और दिखावे का साधन बनाया जा रहा है। धाम को कॉरपोरेट मॉडल बनाने का आरोप कांग्रेस ने कहा कि बाबा के धाम में दर्शन व्यवस्था कभी मोबाइल ऐप, पासवर्ड और तकनीकी जाल पर आधारित नहीं रही है। सदियों से श्रद्धा, विश्वास, परंपरा और सरलता ही प्रवेश का माध्यम रही है। लेकिन वर्तमान प्रशासन ने बाबा के दरबार को कॉरपोरेट मॉडल पर चलाने का प्रयास शुरू कर दिया है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी और एसडीएम अपनी सीमाएं भूल चुके हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा छोड़कर अधिकारी स्वयं को बाबा के दरबार का मालिक समझ बैठे हैं। ऐप आधारित व्यवस्था सीधे-सीधे आम जनमानस,गरीबों, किसानों, मजदूरों, बुजुर्गों, महिलाओं, ग्रामीण श्रद्धालुओं और तकनीकी संसाधनों से दूर लोगों के खिलाफ षड्यंत्र है। श्रद्धालु घंटों लाइन में खड़े रहें, स्थानीय लोग परेशान हों, बुजुर्ग भटकते रहें, इससे प्रशासन को कोई सरोकार नहीं है। उन्हें केवल वीआईपी संस्कृति, चमक-दमक और धन उगाही की चिंता है।काशी के मूल निवासियों को बाबा से दूर करने की साजिश लंबे समय से चल रही है। अधिकारियों को हटाने की मांग, आंदोलन की चेतावनी जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और जनविरोधी कार्यशैली के आरोप हैं, उन्हें तत्काल जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए।साथ ही काशीवासियों के लिए निर्धारित दर्शन द्वारों की समय सीमा तत्काल बढ़ाई जाए, स्थानीय नागरिकों के लिए सहज प्रवेश सुनिश्चित किया जाए और सरल दर्शन व्यवस्था बहाल की जाए। तुगलकी आदेश तत्काल वापस नहीं लिया गया तो कांग्रेस पार्टी, काशीवासी, संत समाज और बाबा के भक्त व्यापक जनआंदोलन करने को बाध्य होंगे। सड़कों से लेकर मंदिर मार्ग तक लोकतांत्रिक तरीके से विरोध होगा और इस जनविरोधी व्यवस्था को वापस लेने तक संघर्ष जारी रहेगा। काशी की पहचान उसकी आध्यात्मिक गरिमा, सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपरा, घंटों की ध्वनि, गंगा की आरती और बाबा विश्वनाथ की कृपा से है। इसे मोबाइल ऐप, प्रशासनिक अहंकार और बाजारी मानसिकता से नहीं चलाया जा सकता। जो लोग काशी की आत्मा को नहीं समझते, वे यहां की व्यवस्था भी नहीं समझ सकते। कांग्रेस पार्टी काशी की आस्था, संस्कृति, प्राचीनता और जनाधिकारों की रक्षा के लिए हर संघर्ष करेगी।
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