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उदयपुर की हीरा बावड़ी से निकला 3 ट्रैक्टर कचरा: सालों से गंदगी और बदबू में दबी थी ऐतिहासिक विरासत, ग्रामीणों और सार संवाद ने 4 घंटे में बदली सूरत – Udaipur News

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उदयपुर की हीरा बावड़ी से निकला 3 ट्रैक्टर कचरा:  सालों से गंदगी और बदबू में दबी थी ऐतिहासिक विरासत, ग्रामीणों और सार संवाद ने 4 घंटे में बदली सूरत – Udaipur News

उदयपुर की हीरा बावड़ी से निकला 3 ट्रैक्टर कचरा: सालों से गंदगी और बदबू में दबी थी ऐतिहासिक विरासत, ग्रामीणों और सार संवाद ने 4 घंटे में बदली सूरत – Udaipur News


उदयपुर में सालों से अनदेखी और कचरे का ढेर बनी तितरड़ी इलाके की हीरा बावड़ी की सूरत अब पूरी तरह बदल गई है। सार संवाद मंच और स्थानीय लोगों ने मिलकर इस बावड़ी को कचरे को पूरी तरह से साफ कर दिया। रविवार को तितरड़ी और फांदा के ग्रामीण सुबह से ही इस काम में जुट गए थे। करीब 4 घंटे तक चली इस कड़ी मशक्कत और सफाई मुहिम में बावड़ी के भीतर जमा सालों पुराने कूड़े को बाहर निकाला गया। सुबह 7 बजे से 11 बजे तक यह अभियान चला। सफाई के दौरान बावड़ी के भीतर से जो कुछ निकला, उसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। वहां सालों से प्लास्टिक की थैलियां, कांच की बोतलें और गहरा कीचड़ जमा था। ग्रामीणों और संस्था के सदस्यों ने मिलकर करीब 3 ट्रैक्टर कचरा बाहर निकाला। कचरा निकालने के बाद पूरी बावड़ी को पानी से अच्छी तरह धोया गया ताकि इसका पुराना और असली स्वरूप वापस लौट सके। अब यह बावड़ी पहले की तरह चमकने लगी है और यहां से आने वाली बदबू भी खत्म हो गई है। सार संवाद मंच के संयोजक अविचल दूबे ने बताया कि यह बावड़ी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार थी। गंदगी इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि इसका अस्तित्व ही खतरे में नजर आने लगा था। आसपास रहने वाले लोग यहां फैली बदबू और गंदगी की वजह से काफी परेशान थे। इस अभियान के बारे में वॉलियंटर्स अनन्य सिंघल ने कहा कि सार संवाद का यह दूसरा साल है और यह मुहिम लगातार जारी है। पिछले साल की तरह इस बार भी सीजन में रविवार को शहर की किसी एक बावड़ी को चुना जाएगा और स्थानीय लोगों के सहयोग से उसे पूरी तरह साफ किया जाएगा। वॉलियंटर्स कौशिक घोष ने बताया कि इस टीम ने अब तक कुल 7 बावड़ियों को नया जीवन दे दिया है। हीरा बावड़ी से ठीक पहले बेड़वास की बावड़ी को भी इसी तरह ग्रामीणों की मदद से चमकाया गया था। तितरड़ी और फांदा के लोगों ने इस पहल की जमकर तारीफ की है और खुद भी इसे भविष्य में साफ रखने का वादा किया है। स्थानीय ग्रामीण प्रेमसिंह ने बताया कि ऐतिहासिक धरोहरों को बचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। सफाई के साथ ही ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने एक बड़ी मांग भी रखी है। उनका कहना है कि चूंकि अब यह पूरा इलाका नगर निगम के अंतर्गत आता है, इसलिए नगर निगम के अधिकारियों को बेड़वास और हीरा बावड़ी जैसी ऐतिहासिक जगहों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना चाहिए। स्थानीय निवासी मनोहर सिंह ने कहा कि अगर सरकार यहां ध्यान दे तो इन बावड़ियों की ऐतिहासिक पहचान को हमेशा के लिए संरक्षित रखा जा सकता है। सफाई अभियान के अंत में सभी ने शहरवासियों से अपील की कि वे सार्वजनिक स्थलों पर कचरा न फैलाएं और स्वच्छता बनाए रखने में प्रशासन और संस्थाओं का सहयोग करें।

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