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महिला आरक्षण से जुड़े बिल पर सीएम की प्रेस कॉन्फ्रेंस: भोपाल में बोले- संसद में बहनों की इज्जत के साथ खेलने का घटनाक्रम हुआ, यह निंदनीय – Bhopal News

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महिला आरक्षण से जुड़े बिल पर सीएम की प्रेस कॉन्फ्रेंस:  भोपाल में बोले- संसद में बहनों की इज्जत के साथ खेलने का घटनाक्रम हुआ, यह निंदनीय – Bhopal News

महिला आरक्षण से जुड़े बिल पर सीएम की प्रेस कॉन्फ्रेंस: भोपाल में बोले- संसद में बहनों की इज्जत के साथ खेलने का घटनाक्रम हुआ, यह निंदनीय – Bhopal News


भोपाल में प्रदेश भाजपा कार्यालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल पहुंचे। उनके साथ भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा, मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री कृष्णा गौर, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी परांजपे, विधायक अर्चना चिटनिस और मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल मौजूद है। महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। सीएम इस पर बात कर रहे है। उन्होंने कहा, हमारे लोकतंत्र में जो घटनाक्रम हुआ, वह एक निर्णायक दौर तक पहुंच गया था। हम सबने उस घटना और उसे दुर्घटना में बदलने वाले कारणों को देखा है। द्रौपदी का चीरहरण तो हमने 5000 साल पहले का सुना था, लेकिन बहनों की इज्जत के साथ खेलने का घटनाक्रम संसद में जिस प्रकार हुआ, वह हमारे लिए अत्यंत कष्टकारी और निंदनीय है। प्रधानमंत्री मोदी जी और अमित शाह जी ने प्रस्तावक बनकर जो निर्णय लिया, उसमें शुरुआत से ही हर दल को सुझाव देने का अवसर दिया गया। मोदी जी ने सभी को खुला पत्र भी लिखा, ताकि कोई यह न कहे कि हमें बोलने का अवसर नहीं मिला या हमसे चर्चा नहीं की गई। ‘चुनाव में समय है, तो विपक्ष विरोध कर रहा’ सीएम ने कहा कि 2023 में जिस अधिनियम को सभी ने पास किया था और समर्थन दिया था, उसी मामले में अब विपक्ष पलट गया। जब चुनाव नजदीक थे तो समर्थन किया, लेकिन अब जबकि चुनाव में समय है, तो विरोध कर रहे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मानसिकता लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि अलगाववादी नजर आती है और मैं इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। सीएम ने कहा कि आज जब बहनों को अधिकार देने की बात आई, तो विपक्ष ने किंतु-परंतु लगाकर उन्हें अपमानित करने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पहले भी तीन तलाक जैसे मुद्दों पर गलत निर्णय लिए और महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी की। ‘उत्तर-दक्षिण का विवाद बेवजह खड़ा किया जा रहा, गृहमंत्री ने दिया जवाब’ सीएम ने कहा कि 1971 में देश की आबादी 55-54 करोड़ थी और आज 140 करोड़ से ज्यादा हो गई है, तो उसी अनुपात में सीटें भी बढ़नी चाहिए। गृहमंत्री ने इस विषय पर हर सवाल का जवाब दिया और स्पष्ट किया कि उत्तर-दक्षिण का विवाद बेवजह खड़ा किया जा रहा है। दक्षिण भारत में भी सीटें बढ़ेंगी। सीएम ने कहा कि ऐसा लगता है विपक्ष ने तय कर लिया है कि बहनों को उनका हक नहीं देने देंगे। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले इस आरक्षण की बात क्यों नहीं की गई, यह भी सवाल है। जातिगत जनगणना बंद करने का पाप भी कांग्रेस के सिर पर है। प्रदेश में प्रदयात्रा निकाली जाएगी सीएम ने कहा कि भले ही संख्या बल में कोई आगे हो, लेकिन देश की बहनों का दिल दुखाने के लिए उन्हें माफ नहीं किया जाएगा। जनता सबसे बड़ी अदालत है। इस मुद्दे को लेकर पूरे देश में सरकार, पार्टी और समाज के माध्यम से जन-जागरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पदयात्रा और आक्रोश सभाएं आयोजित की जाएंगी। यह आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस इसकी पहली कड़ी है, इसके बाद प्रदर्शन किए जाएंगे। आगे विभिन्न जिलों, नगर पालिकाओं, नगर निगमों और नगर पंचायतों में प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। जरूरत पड़ी तो विधानसभा का एकदिवसीय सत्र बुलाकर भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम रुकने वाले नहीं हैं। खंडेलवाल बोले- विपक्ष की मानसिकता महिला विरोधी इधर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि संसद में देश की आधी आबादी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय था, जिसे विपक्ष, राहुल गांधी और उनके सहयोगियों ने यह बता दिया कि उनकी मानसिकता महिला विरोधी है। मैं समझता हूं कि कांग्रेस का जो जश्न था, वह एक तरह से हमारी बहनों का अपमान था। आप सबको विदित है कि पिछले कई सालों से सभी दल किसी न किसी रूप में यह चाहते थे कि महिला आरक्षण लागू हो, लेकिन जब इसे लागू करने का विषय आया तो विपक्ष का असली चेहरा उजागर हो गया। ‘विपक्ष ने बिल को नहीं दिया समर्थन’ भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 16 और 17 अप्रैल को संसद में चर्चा में आया। 16 अप्रैल को सभी ने अपने-अपने विचार रखे और 17 अप्रैल को चर्चा के बाद इस बिल को पारित कर लागू किया जाना था, लेकिन नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विपक्ष ने विरोध किया। 70 साल से देश की नारी अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रही थी और 33% आरक्षण की मांग कर रही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह लगातार प्रयास कर रहे थे कि महिलाओं को उनका अधिकार मिले। लेकिन जब 2023 में यह बिल संसद में आया तो विपक्ष ने राजनीतिक कारणों से समर्थन किया, क्योंकि इसके बाद लोकसभा चुनाव थे। जब इसे लागू करने की बात आई तो विपक्ष ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती थी कि सभी दल मिलकर इस बिल को लागू करें, लेकिन विपक्ष ने इसका विरोध किया। ये खबर भी पढ़ें… महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया। पूरी खबर पढ़ें…

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