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जमीन की हेराफेरी: धीमी गति – अवैध कॉलोनियों के रकबे का पता नहीं, पुलिस जांच भी होगी, तब हो पाएगी एफआईआर – Gwalior News

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जमीन की हेराफेरी:  धीमी गति – अवैध कॉलोनियों के रकबे का पता नहीं, पुलिस जांच भी होगी, तब हो पाएगी एफआईआर – Gwalior News

जमीन की हेराफेरी: धीमी गति – अवैध कॉलोनियों के रकबे का पता नहीं, पुलिस जांच भी होगी, तब हो पाएगी एफआईआर – Gwalior News


जिले की 51 अवैध कॉलोनियों से जुड़े 79 लोगों के खिलाफ एफआईआर की प्रक्रिया 24 घंटे बाद भी नहीं हो सकी। कारण-कलेक्टर न्यायालय से बुधवार को जारी आदेश गुरुवार शाम 6 बजे तक एसडीएम कार्यालयों तक नहीं पहुंच सके। अब अगले तीन दिन शासकीय छुट‌टी के चलते कार्यालय बंद रहेंगे। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2024 से अवैध कॉलोनियों की इन मामलों को लेकर प्रकरणों में सुनवाई चल रही है।
पूरे मामले में बड़ा खेल जमीन के रकबे को लेकर सामने आ रहा है। प्रशासन द्वारा जारी सूची में 51 कॉलोनियों के नाम और रकबे का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। जबकि अभी पुलिस जांच करेगी। इसके बाद एफआईआर हो पाएगी। क्योंकि अवैध कॉलोनी के मामलों में पुलिस के पास शिकायत पहुंचने के बाद जांच के नाम पर सालभर बाद एफआईआर होती है। हाल ही में जीडीए के मामले में ऐसा ही देखना को मिला। इसलिए एफआईआर में लंबा समय लग सकता है। वहीं कलेक्टर रुचिका चौहान ने कहा कि जमीन के रकवे का उल्लेख आदेश में है, लेकिन सभी की इकजाई जानकारी देना मुश्किल है। मुरार क्षेत्र में 33 कॉलोनियों के 48 लोगों पर, ग्वालियर सिटी में 10 कॉलोनियों के 21 लोगों पर FIR होना है। एसडीएम नरेश गुप्ता व प्रदीप शर्मा को गुरुवार शाम 6 बजे तक आदेश नहीं मिला था। रिकॉर्ड में मौजूद हैं साक्ष्य
अवैध कॉलोनी में रजिस्ट्री पर रोक के कई आदेश प्रशासन दे चुका है। वहीं पंजीयन एक्ट में रजिस्ट्री पर रोक नहीं है। जो 51 की सूची है उसमें मोहना की 3 अवैध कॉलोनियां शामिल हैं। यहां पर 30 मार्च को मोहिनी नाम की महिला को रजिस्ट्री हुई। ऐसे ही और भी रजिस्ट्री पंजीयन विभाग के पोर्टल पर मौजूद हैं। भूमाफिया बच जाएगा पर किसान फंस जाएंगे
आदेश जारी होने के बाद कलेक्ट्रेट में कुछ कॉलोनाइजर पहुंचे। राजस्व अफसरों ने कहा कि कुछ मामले ऐसे भी हैं जहां भू-माफिया ने किसानों से जमीन लेकर रजिस्ट्री उन्हीं से कराई है। ऐसी स्थिति में माफिया बच जाएगा और किसान फंसेगा, क्योंकि साक्ष्य उसके खिलाफ ही रहेंगे। जहां प्लॉट कटे, वहां निजी जमीन लगभग 150 बीघा
कलेक्ट्रेट पहुंचे एक कॉलोनाइजर ने 11 हजार वर्ग फीट में दूसरे ने 7 बीघा में प्लाट काटे। न्यायालय ने 51 कॉलोनियां का वास्तविक रकबा स्पष्ट नहीं किया है। राजस्व अफसरों ने कहा कि सभी अवैध कॉलोनियां का रकबा लगभग 150 बीघा बैठेगा। गांव में छोटी कॉलोनियां कटती हैं। क्रेडाई ने कहा- ऐसे मामलों में दोनों पक्ष दोषी
क्रेडाई के ग्वालियर अध्यक्ष सुदर्शन झंवर ने कहा कि अवैध कॉलोनी में प्लाट खरीदने पर दोनों पक्ष दोषी हैं। जो प्लॉट खाली हैं उन्हें सरकार अपने कब्जे में लेगी, नहीं बचे होंगे तो खरीदे गए प्लाट भी अपने कब्जे में ले सकता है प्रशासन। झंवर ने कहा कि हर समय प्लॉट खरीदते समय मंजूरियां देखनी चाहिए। सुनवाई 7-21 को होगी
अवैध कॉलोनियों के जो 152 प्रकरण कलेक्टर न्यायालय मे हैं उनमें से आधे से अधिक में 7 व 21 अप्रैल को सुनवाई होना है। अन्य प्रकरण भी सुनवाई में हैं। फिलहाल बाकी रहे दोषियों के खिलाफ आदेश की स्थिति नहीं है। ये प्रकरण दिसंबर 2024 के बाद के हैं जो क्षेत्र के एसडीएम ने भेजे हैं।
एक्सपर्ट – बीएम शर्मा, रिटायर संभाग आयुक्त

बोर्ड लगाना चाहिए ताकि लोग ठगों से बच सकें अवैध कॉलोनाइजर के खिलाफ सामान्य तौर पर एफआईआर देरी से होती है। परेशान वह किसान होता है जो अपनी जमीन का एग्रीमेंट करके कॉलोनाइजर को कॉलोनी काटने की सहमति देता है। अंत में पकड़ा भी यही जाता है। प्रशासन को किसानों को जागरुक करना चाहिए कि वे इस तरह के एग्रीमेंट से बचें। जहां अवैध कॉलोनी बस रही है वहां पर क्षेत्र के सरकारी अमले को निगरानी व सूचना बोर्ड लगाना चाहिए। क्योंकि भोले भाले लोग बड़ी मुश्किल से खून पसीना एक करके जुटाए गए पैसों से प्लाट खरीदते हैं। बाद में उसे ही कसूरवार मानकर कभी तोड़फोड़ की धमकी दी जाती है तो वह कभी नोटिस के कारण न्यायालय की शरण में पहुंचना पड़ता है। यदि भू-माफिया प्रशासन के ऐसे बोर्ड हटाया है तो उसके खिलाफ भी प्रकरण दर्ज कराया जाना चाहिए।

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