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लखनऊ में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट ने मंत्री का आवास घेरा: 53 तारीखों के बाद भी नहीं निकला समाधान, विभाग पर लापरवाही का लगाया आरोप – Lucknow News

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लखनऊ में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट ने मंत्री का आवास घेरा:  53 तारीखों के बाद भी नहीं निकला समाधान, विभाग पर लापरवाही का लगाया आरोप – Lucknow News

लखनऊ में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट ने मंत्री का आवास घेरा: 53 तारीखों के बाद भी नहीं निकला समाधान, विभाग पर लापरवाही का लगाया आरोप – Lucknow News


लखनऊ में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट अभ्यर्थियों का लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन। बुधवार को आयुष मंत्री दयाशंकर सिंह दयालु के आवास का घेराव किया। राशन कार्य अभ्यर्थियों को पुलिस ने हिरासत में लेकर इको गार्डन भेजा। अभ्यर्थियों का कहना है कि 2024 की भर्ती प्रक्रिया में देरी हो रही है। वैकेंसी का फॉर्म भरवाने के बाद मामला कोर्ट में चला गया। 53 तारीखें लग चुकी हैं लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं आया है। दर दर भटकने पर मजबूर हैं। 53 तारीखों के बाद भी नहीं निकला समाधान मानक राय ने बताया कि भर्ती प्रक्रिया कोर्ट केस के कारण अटकी हुई है। अब तक 53 तारीखें लग चुकी हैं। लगातार बढ़ती तारीखों से अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है। सरकारी पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी न होने के कारण मामला लंबित चल रहा है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। रोजगार की आस में घर-परिवारवाले भी बैठे हैं। हम लोग बेहद गरीब परिवार से आते हैं अगर नौकरी नहीं मिली तो स्थिति और भी दयनीय हो जाएगी। प्रदेश में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के 60% पद खाली अभ्यर्थी ने बताया कि पूरे प्रदेश में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट के लगभग 60 प्रतिशत पद खाली हैं। सरकार की ओर से 1002 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, जबकि कुल स्वीकृत पद करीब 2100 हैं। इनमें से लगभग 1200 पद अब भी रिक्त पड़े हैं। 2024 वाली वैकेंसी में भी अप्लाई किया, उसके बाद वैकेंसी कोर्ट चली गई। इतने बड़े पैमाने पर पद खाली होने से आयुष और स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में दवाओं के वितरण और फार्मेसी संचालन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। बेंच वाइज फैसला या लिखित परीक्षा कराने की मांग प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने मांग किया कोर्ट में बेंच-वाइज निर्णय कराकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आवश्यक हो तो सरकार उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) के माध्यम से लिखित परीक्षा आयोजित कर भर्ती प्रक्रिया पूरी कराए। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखते हुए इस मामले में प्राथमिकता से हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि लंबित भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूरी हो सके ।

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