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राष्ट्रीय नेतृत्व ने गोंगपा के निष्कासन निर्णय पर लगाई रोक: मंडला में समिति करेगी जांच, 10 मार्च तक देनी होगी रिपोर्ट – Mandla News

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राष्ट्रीय नेतृत्व ने गोंगपा के निष्कासन निर्णय पर लगाई रोक:  मंडला में समिति करेगी जांच, 10 मार्च तक देनी होगी रिपोर्ट – Mandla News

राष्ट्रीय नेतृत्व ने गोंगपा के निष्कासन निर्णय पर लगाई रोक: मंडला में समिति करेगी जांच, 10 मार्च तक देनी होगी रिपोर्ट – Mandla News


मंडला में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के राष्ट्रीय नेतृत्व ने मध्य प्रदेश इकाई की ओर से पदाधिकारियों के निष्कासन के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम ने प्रेस नोट जारी कर बताया कि इस मामले में समन्वय की कमी के कारण लिया गया निर्णय तत्काल प्रभाव से निरस्त किया गया है। प्रेस नोट के अनुसार, मध्य प्रदेश इकाई की ओर से 5 मार्च 2026 को पत्र क्रमांक GGP/MP/2026/405 के तहत जारी प्रेस विज्ञप्ति को रद्द कर दिया गया है। उस विज्ञप्ति में कुछ पदाधिकारियों को छह सालों के लिए निष्कासित करने की घोषणा की गई थी। समिति बनाकर शुरू की गई प्रक्रिया राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम ने बताया कि पूरे मामले में समन्वय स्थापित करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है। यह समिति सभी संबंधित पक्षों से चर्चा करेगी और 10 मार्च तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। तब तक निष्कासन का निर्णय स्थगित रहेगा। प्रदेश अध्यक्ष ने भी की पुष्टि प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर कमलेश तेकाम ने भी राष्ट्रीय महासचिव के पत्र की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश स्तर पर यह निर्णय लिया गया था, लेकिन संगठन में समन्वय बनाए रखने के लिए इसे फिलहाल रोक दिया गया है। समन्वय समिति की रिपोर्ट आने के बाद राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में अंतिम फैसला लिया जाएगा। प्रदेश बैठक में लिया गया था निष्कासन का फैसला दरअसल, 5 मार्च को मंडला में आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में कुछ पदाधिकारियों को पार्टी से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया था। इन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और सोशल मीडिया के जरिए संगठन की छवि खराब करने का आरोप लगाया गया था। निष्कासित किए गए नेताओं में छिंदवाड़ा जिले के पूर्व जिलाध्यक्ष देवीराम उर्फ देवरावन भलावी, युवा प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष प्रवीण धुर्वे, किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष संदीप इनवाती और सिवनी जिले के छपारा निवासी रावेनशाह उइके शामिल थे। इसके अलावा पूर्व विधायक रामगुलाम उइके और प्रदेश पदाधिकारी एडवोकेट महेश वट्टी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

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