होली की रौनक से गुलजार औरंगाबाद बाजार: जमकर हो रही रंग, गुलाल और पिचकारी की खरीदारी; हर्बल कलर की डिमांड ज्यादा – Aurangabad (Bihar) News h3>
औरंगाबाद में होली पर्व को लेकर सुबह से ही बाजारों में जबरदस्त चहल-पहल देखने को मिली। शहर के हृदयस्थली माने जाने वाले रमेश चौक से लेकर पुरानी जीटी रोड स्थित मेन बाजार तक खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी है। रंग, गुलाल, पिचकारी, टोपी, मुखौटे और बच्चों के होली परिधानों की जमकर बिक्री हुई। दुकानों को रंग-बिरंगी सजावट और आकर्षक डिजाइन वाली पिचकारियों से सुसज्जित किया गया है, जो बच्चों को खासा आकर्षित कर रही है। दुकानदारों के अनुसार 100 से 250 रुपए तक की पिचकारियां सबसे ज्यादा बिक रही हैं। साधारण पिचकारी 50 रुपए से उपलब्ध है, जबकि टंकी वाली पिचकारी 200 से 1100 रुपये तक में मिल रही है। भूत प्रेत और राक्षस वाले मुखौटों का है डिमांड दुकानदार राजू कुमार ने बताया कि इस बार टैंक पिचकारी और अलग-अलग डिजाइन वाले मुखौटों का खासा क्रेज है। टैंक पिचकारी 700 से 1000 रुपए तक बिक रही है, जबकि मुखौटे 250 से 1500 रुपए तक की रेंज में उपलब्ध हैं। बच्चों के बीच शेर, चीता, भूत-प्रेत और राक्षस वाले मुखौटे काफी लोकप्रिय है। पिचकारियों में डमरू, मशीनगन, प्रेशर गन और टंकी वाली पिचकारी की मांग अधिक है। डमरू डिजाइन पिचकारी 250 से 300 रुपए, हथौड़ा 200, त्रिशूल 250 और कुल्हाड़ी 250 रुपए में बिक रही है। पिछले साल के तुलना में इस साल महंगे मिल रहे रंग अबीर दुकानदार सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि त्योहार को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह है, जिससे बाजारों की रौनक चरम पर है। हालांकि महंगाई को लेकर ग्राहक नाराजगी भी जता रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार रंग, अबीर, गुलाल और पिचकारी के दाम बढ़े हैं। थोक में सामान महंगा मिल रहा है, जिसके कारण खुदरा कीमतों में वृद्धि हुई है। 8 रुपए के समान पर 2 रुपए मुनाफा लेकर बेच रहे हैं। हर्बल रंग की बढ़ी डिमांड इधर बाजार में मिलावटी और केमिकलयुक्त रंगों की भी भरमार देखी जा रही है। हालांकि जागरूक ग्राहक हर्बल और प्राकृतिक रंगों की मांग कर रहे हैं, फिर भी कई स्थानों पर खुलेआम सस्ते केमिकल रंग बेचे जा रहे हैं, जो त्वचा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। जानकारों ने लोगों से सुरक्षित और प्रमाणित रंगों का ही प्रयोग करने की अपील की है। चंद्र ग्रहण को लेकर मंदिरों के कपाट बंद उधर, चंद्रग्रहण को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। देव सूर्य मंदिर के पुजारी राजेश पाठक ने बताया कि इस बार होलिका दहन के अगले दिन 3 मार्च को वर्ष का पहला चंद्रग्रहण लगेगा। चंद्रग्रहण के कारण उस दिन रंगभरी होली खेलना शुभ नहीं माना गया है। इसलिए 4 मार्च को होली खेली जाएगी। चंद्रग्रहण को देखते हुए देव सूर्य मंदिर समेत जिले के अन्य मंदिरों के पट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। सतबहिनी मंदिर के पुजारी शास्त्री संतोष पांडेय ने कहा कि चंद्रग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3: 21 मिनट से शुरू होकर शाम 6: 46 मिनट तक रहेगा। भारत में यह 5: 51 मिनट से दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक काल सुबह 6: 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6: 46 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान मंदिरों के पट बंद रहेंगे। संध्या 7:00 के बाद मंदिरों को गंगाजल से पवित्र कर आरती और पूजा की जाएगी।
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