Advertising
<

हम एक थाली में खाने वाले-छात्र…नया-एक्ट हमारी मित्रता में दीवार: कानपुर में छात्र मुखर होकर कर रहे विरोध बोले UGC का काला कानून वापस हो – Kanpur News

6
हम एक थाली में खाने वाले-छात्र…नया-एक्ट हमारी मित्रता में दीवार:  कानपुर में छात्र मुखर होकर कर रहे विरोध बोले UGC का काला कानून वापस हो – Kanpur News

हम एक थाली में खाने वाले-छात्र…नया-एक्ट हमारी मित्रता में दीवार: कानपुर में छात्र मुखर होकर कर रहे विरोध बोले UGC का काला कानून वापस हो – Kanpur News


शहर में यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के छात्रों ने यूजीसी के नए कानून के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया है। छात्रों का कहना है कि यह कानून शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय छात्रों को आपस में बांटने वाला साबित होगा। इसी के चलते छात्रों ने सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। किसी का कहना है कि हम एक थाली में खाने वाले छात्र है तो कोई इसे मित्रता में दीवार बता रहा है। हम एक साथ बैठने में हिचकिचा रहे छात्र नेता अभिजीत राय ने कहा कि यूजीसी का नया कानून विश्वविद्यालय की मर्यादा को भंग करने वाला है। हम छात्रों के बीच में मतभेद पैदा करने का काम हो रहा है। छात्रों की दोस्ती और पढ़ाई में असर पड़ रहा है। हम एक साथ बैठने में हिचकिचा रहे हैं। हम एक थाली में खाने वाले छात्र हैं। यूजीसी के इस कानून का हम सड़क से लेकर सदन तक विरोध करेंगे और इसको वापस लेने की मांग करतेहैं। काले कानून की हम निंदा करते आर्यन ठाकुर का कहना है कि यूजीसी ने 1956 में जो एक्ट लाया था वह छात्रों की समानता के लिए लाया गया था ना कि आपसी भेदभाव को बनाए रखने के लिए लाया गया था। नया एक्ट ओबीसी और एससी छात्रों से हमारी मित्रता में दीवार बनकर खड़ा हो गया है। ऐसे काले कानून की हम घोर निंदा करते हुए उसे वापस लेने की मांग करते हैं। हम जल्द ही जनसभा करेंगे यूजीसी का पुतला फूकेंगे। समानता का हनन करने वाला वरिष्ठ छात्र नेता व एडवोकेट अरविंद राज त्रिपाठी ने कहा कि यूजीसी का 2026 में जो बिल आया है वह समानता का हनन करने वाला बिल है। इस बिल में कई कमियां हैं, जिससे सामान्य वर्ग की भावनाएं आहत हो रही हैं। निश्चित तौर पर हमको पहले से दोषी मानकर कार्रवाई की जाएगी। गलत शिकायत करने वाले पर दंड का प्रावधान नहीं है। एक साथ रहते हैं
छात्रों का कहना है कि कैंपस में वे बिना किसी भेदभाव के क्लास, हॉस्टल और मेस में एक साथ रहते हैं। नए एक्ट छात्रों के बीच अलगाव और असमानता पैदा कर सकते हैं। छात्रों ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य समानता और समावेश को बढ़ावा देना है, जबकि नया कानून इसके उलट प्रभाव डाल सकता है। शैक्षणिक माहौल होगा प्रभावित
विरोध कर रहे छात्रों ने बताया कि यूजीसी का यह नया कानून शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करेगा और छात्रों के बीच आपसी सौहार्द को नुकसान पहुंचाएगा। उनका कहना है कि विश्वविद्यालयों में पहले से ही पढ़ाई, शोध और रोजगार को लेकर चुनौतियां मौजूद हैं, ऐसे में इस तरह के कानून से छात्रों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव पड़ेगा।

उत्तर प्रदेश की और खबर देखने के लिए यहाँ क्लिक करे – Uttar Pradesh News