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वाराणसी में राहुल गांधी के खिलाफ पुनरीक्षण-याचिका पर सुनवाई आज: अमेरिका में सिखों पर टिप्पणी की थी, ACJM कोर्ट से पहली अपील खरीज हो चुकी – Varanasi News

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वाराणसी में राहुल गांधी के खिलाफ पुनरीक्षण-याचिका पर सुनवाई आज:  अमेरिका में सिखों पर टिप्पणी की थी, ACJM कोर्ट से पहली अपील खरीज हो चुकी – Varanasi News

वाराणसी में राहुल गांधी के खिलाफ पुनरीक्षण-याचिका पर सुनवाई आज: अमेरिका में सिखों पर टिप्पणी की थी, ACJM कोर्ट से पहली अपील खरीज हो चुकी – Varanasi News

अमेरिका यात्रा के दौरान भारत में रह रहे सिखों को लेकर दिए गए बयान के मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आज वाराणसी जिला जज कोर्ट में सुनवाई होगी। कांग्रेस सांसद के खिलाफ यह वादी की ओर से पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई है।

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इस पर शनिवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन सेंट्रल बार एसोसिएशन चुनाव में वकीलों की सहभागिता के कारण जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने याचिका पर अगली सुनवाई के लिए सात जनवरी यानि बुधवार की तिथि मुकर्रर कर दी थी

इससे पहले अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (चतुर्थ) एमपी-एमएलए नीरज कुमार त्रिपाठी ने 17 अक्टूबर 2025 को नागेश्वर मिश्र की प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया था। इसके बाद ACJM के आदेश के खिलाफ आशापुर (सारनाथ)निवासी नागेश्वर मिश्र ने जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की है।

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चतुर्थ (एमपी-एमएलए) नीरज कुमार त्रिपाठी की कोर्ट ने पिछले महीने ही राहुल गांधी के याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई पूरी कर ली थी। राहुल गांधी के खिलाफ केस दर्ज किया जाने की मांग पर साक्ष्य, गवाह और रिपोर्ट का अवलोकन भी कर लिया था।

कोर्ट में दाखिल दोनों पक्षों के जवाब और वकीलों की जिरह सुनी और सिखों पर अमेरिका में बयान देने के मामले में वादी के दस्तावेजों की मजबूत नहीं पाया। केस के अहम पहलुओं पर चर्चा के बादयाचिका को निरस्त कर दिया ।

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जानिए पूरा मामला और राहुल गांधी विवाद

सिख सम्प्रदाय के लोगों की भावनाएं आहत

सारनाथ थाना क्षेत्र के तिलमापुर में रहने वाले पूर्व ग्राम प्रधान नागेश्वर मिश्र ने MP-MLA कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। याचिका में नागेश्वर मिश्र ने बताया कि पिछले दिनों कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अमेरिका दौरे पर भड़काऊ बयान दिया था। इस बयान से सिख सम्प्रदाय के करोड़ों लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।

राहुल ने कहा था कि भारत में सिखों को पगड़ी और कड़ा पहनने का अधिकार नहीं है। ना ही उन्हें गुरद्वारा में जाने की इजाजत है। इस बयान का खालिस्तानी आतंकवादी गुरुवंत सिंह पन्नू ने भी समर्थन किया है। उनके बयान से यह लगता है कि उनका मिशन भारत में गृहयुद्ध भड़काने का है। ​​​​​​

आज यानि सोमवार को पूर्व प्रधान की ओर से कोर्ट में एडवोकेट विवेक शंकर तिवारी और अलख राय ने दलीलें पेश करेंगे। सरकारी वकील के तौर पर एडीजीसी विनय कुमार सिंह ने पक्ष रखा। अभियोजन की ओर से कोर्ट में मामले में अब तक की कार्यवाही पेश करेंगे।

क्या बोले राहुल, जिस पर मचा बवाल…

राहुल ने कहा था- सिखों को चिंता है कि क्या वे गुरुद्वारे जा सकेंगे

10 सितंबर, 2024 को अमेरिका में राहुल ने कहा था- भारत में सिख समुदाय के बीच इस बात की चिंता है कि उन्हें पगड़ी, कड़ा पहनने की इजाजत दी जाएगी या नहीं? क्या वे गुरुद्वारे जा सकेंगे? ये चिंता सिर्फ सिखों की नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लिए है।

देश सबका है, यह BJP नहीं मानती। BJP को समझ में नहीं आता कि यह देश सबका है। भारत एक संघ है। संविधान में साफ लिखा है। भारत एक संघ राज्य है, जिसमें विभिन्न इतिहास, परंपराएं, संगीत और नृत्य शामिल हैं। BJP कहती है कि ये संघ नहीं है, ये अलग है।

RSS भारत को नहीं समझती। RSS कहती है कि कुछ राज्य दूसरे राज्यों से कमतर हैं। कुछ भाषाएं दूसरी भाषाओं से, कुछ धर्म दूसरे धर्मों से, कुछ समुदाय दूसरे समुदाय से कम हैं। हर राज्य का अपना इतिहास, परंपरा है। RSS की विचारधारा में तमिल, मराठी, बंगाली, मणिपुरी हैं, ये कमतर भाषाएं हैं। इसी बात पर लड़ाई है। RSS भारत को नहीं समझती।

राहुल गांधी ने कहा था- आरक्षण खत्म करने का सही समय नहीं

राहुल ने कहा था- आरक्षण खत्म करने का अभी सही समय नहीं। कांग्रेस आरक्षण खत्म करने के बारे में तब सोचेगी, जब सही समय होगा। जब आप वित्तीय आंकड़ों को देखते हैं, तो आदिवासियों को 100 रुपए में से 10 पैसे मिलते हैं, दलितों को 100 रुपए में से 5 रुपए मिलते हैं और OBC को भी लगभग इतनी ही रकम मिलती है।

भारत के बिजनेस लीडर्स की लिस्ट देखें। मुझे लगता है कि टॉप 200 में से एक OBC है, जबकि वे भारत में 50% हैं, लेकिन हम इस बीमारी का इलाज नहीं कर रहे हैं।

वाराणसी कोर्ट में यह याचिका तिलमापुर के पूर्व प्रधान नागेश्वर मिश्रा ने दायर की थी। हालांकि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने 28 नवंबर, 2024 को उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने MP-MLA कोर्ट ने याचिका दाखिल की, जिसे जज यजुवेंद्र विक्रम सिंह की कोर्ट ने बाद में अपनी सहमति दे दी।

28 नवंबर 24 को खारिज हुई थी पहली याचिका

वादी तिल्मापुर निवासी नागेश्वर मिश्र ने इसे भारत विरोधी बयान बताते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चतुर्थ वाराणसी की कोर्ट में वाद प्रस्तुत किया था। उक्त कोर्ट ने नागेश्वर मिश्र की याचिका को 28 नवंबर 2024 को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि देश के बाहर किए गए अपराध के संबंध में भारत सरकार की पूर्वानुमति के बिना नहीं मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

17 अक्टूबर 2025 को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (चतुर्थ) एमपी-एमएलए नीरज कुमार त्रिपाठी के आदेश के खिलाफ नागेश्वर मिश्र ने अपर सत्र न्यायालय पंचम के समक्ष एक पुनर्विचार याचिका प्रस्तुत की ।

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